हादसे इंसान के संग..

हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे..
लफ़ज़ कागज़ पर उतर जादूगरी करने लगे..
कामयाबी जिसने पाई उनके घर तो बास गए..
जिनके दिल टूटे वो आशिक़ शायरी करने लगे…

Haadse Insan ke sang Maskhari karne lage..
Lafaz Kagaz par utar Jadugari karne lage..
Kamyabi jisne pai unke ghar to bass gae..
Jinke Dil toote wo Aashiq Shayari karne lage…

हारा हुआ सा…

हारा हुआ सा लगता है वजूद मेरा,
हर एक ने लूटा है दिल का वास्ता देकर..

Hara hua sa lagta hai Wajood mera,
Har ek ne loota hai Dil ka wastaa dekar..

ज़िन्दगी बेरंग बेनूर सी..

ज़िन्दगी बेरंग बेनूर सी क्यों है, ज़िन्दगी की हर ख़ुशी हमसे दूर क्यों है..?
वक़्त बीत जाएगा यूँ ही इंतज़ार में लगता है, आखिर खुदा खुद में इतना मगरूर क्यों है.. ??

Zindagi Berang Benoor si kyon hai, Zindagi ki har Khushi humse Door kyon hai..?
Waqt beet jaega yu hi Intzaar mein lagta hai, Akhir Khuda khud mein itna Magroor kyon hai.. ??

उसको पाना मेरी ज़िन्दगी..

उसको पाना मेरी ज़िन्दगी का वो ख्वाब है,
जिसकी मंज़िल ही नहीं रास्ता भी खराब है..!!
हंसी से मेरे दर्द का अंदाज़ा मत लगाना,
इस दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है .. !!

Usko panaa meri Zindagi ka wo Khwaab hai,
jiski Manzil hi nahi rastaa bhi Khraab hai.
Hansi se mere Dard ka Andaaza mat lgana,
is Dil ka har Pannaa Dard ki Kitaab hai…

एक परवाह ही..

एक परवाह ही बताती है कि ख्याल कितना है वरना कोई तराज़ू नहीं होता रिश्तो में..
Ek Parwaah hi btati hai ki Khyal kitna hai warna koi Trazoo nahi hota hai Rishto mein..

हसरतें मिट गई सारी..

हसरतें मिट गई सारी पर दिल को चैन ना आया..
तलब थी जिससे मिलने की अफ़सोस उसे मेरा ख्याल भी नहीं आया..

Hasrtein mit gai sari par dil ko Chain na aya..
Talab thi jisse milne ki Afsos use mera khyal bhi nahi aya..

कभी कभी ..

कभी कभी खुद के लिए भी जीने की इच्छा होती है,
पर ज़िम्मेदारियाँ उतना भी वक़्त नहीं देती है.. !!

Kabhi Kabhi Khud ke liye bhi jeene ki Ichha hoti hai,
Par Zimmedariyan utna bhi waqt nahi deti hai..

हमें हद में..

हमें हद में रहना पसंद है और लोग इसे गुरूर समझते हैं…
Hmein Hadh mein rehna Pasand hai aur log ise Guroor smjhte hainn..

जलाये जो चिराग..

जलाये जो चिराग, तो अँधेरे बुरा मान बैठे..
छोटी सी ज़िन्दगी है साहेब, किस-किस को मनाएंगे हम..

Jlaaye jo Chiraag, to Andhere bura maan baithe..
Chhoti si Zindagi hai Saheb, kis-kis ko mnayenge hum..

तनहा सा…

तनहा सा हो गया है, मेरा कमरा आजकल.
एक पंखा बोला करता था, पर अब सर्दियाँ आ गई हैं..

Tanha sa ho gya hai, Mera kamra aajkal.
Ek Pankhaa bola karta tha, Par ab Sardiyan aa gai hain..