सकारात्मक विचार

सकारात्मक विचार आपको जीवन के उज्जवल पक्ष पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दे सकते हैं। एक सकारात्मक व्यक्ति खुशी और सफलता का आनंद ले सकता है क्योंकि वह मानता है कि वह अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं और कठिनाइयों को आसानी से दूर कर सकता है। सभी लोग आम तौर पर सकारात्मक सोच से सहमत नहीं होते हैं। वास्तव में, कुछ लोग इसे बकवास मानते हैं। हालांकि, ऐसे कई लोग हैं जो इसकी प्रभावशीलता पर विश्वास करते हैं। यदि आप इसे अपने जीवन में उपयोग करना चाहते हैं तो आपको अपने हर काम में सकारात्मक सोच के दृष्टिकोण का अभ्यास करना चाहिए।

सकारात्मक विचार कैसे करें

कई बार सबसे असरदार दवाई भी पूरी तरह से ठीक होने में सहायक नहीं हो पाती | यदि आप बीमारी या जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव से परेशान हैं तो यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जो आपके नकारात्मक विचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण में शामिल करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

  • बात करते समय, केवल सकारात्मक शब्दों का उपयोग करने का प्रयास करें: यदि आप अपने आप को “मैं नहीं कर सकता” तो आप खुद को मना सकते हैं कि यह सच्चाई है। इसके बजाय खुद को “मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा” बताने की कोशिश करें।
  • अपनी नकारात्मक भावनाओं को दूर रखें और जीवन में सकारात्मक चीजों पर ध्यान केंद्रित करें: जब आप नीचे महसूस कर रहे हों, तो इन नकारात्मक विचारों से प्रभावित न हों।
  • अपने विचारों को उन शब्दों से भरें जो ताकत और सफलता का आह्वान करते हैं: उन शब्दों पर ध्यान दें जो आपको खुश और मजबूत बना सकते हैं बजाय इसके कि आप अपूर्ण महसूस कर सकें।
  • अपने दिमाग पर एक सकारात्मक प्रतिज्ञान(द्रिढ वचन)बनाएँ: सबसे अच्छा सकारात्मक विचारों में से एक है अपने आप को यह बताना कि “मैं खुश रहने के लायक हूँ।” यह मानना ​​है कि यह एक वास्तविकता है जो आपको जीवन पर एक सकारात्मक दृष्टिकोण दे सकती है।
  • जब आप चिंतित महसूस करना शुरू करते हैं, तो अपने आप को खुश विचारों के लिए निर्देशित करें: सकारात्मकता को बढ़ावा देने और बुरी भावनाओं से बचने के लिए अपने दिमाग में एक सकारात्मक छवि बनाएं
  • हमेशा विश्वास रखें कि आप सफल हो सकते हैं: अपने आप को इस विश्वास से लाभ दें कि आप अपने लक्ष्यों को पूरा करने में सफल होंगे ।।
नकारात्मकता में फंसने के बजाय इन सबसे अलग सकारात्मक विचारों और धारणाओं की ओर मुड़ें, “सकारात्मक विचार खुशी की कुंजी हैं।” अपनी सुबह की शुरुआत एक छोटे सकारात्मक विचार के साथ करें, जो आपको दिन भर प्रेरित करे। सकारात्मक विचार और प्रार्थना हमारे जीवन के कठिन समय के दौरान बहुत सहायक होते हैं। “हमेशा सकारात्मक सोचें!

दिन के सुंदर सकारात्मक विचार

सकारात्मक सोचने का मतलब यह नहीं है कि आपने कोई गलती नहीं की है। उन चीजों के बारे में ध्यान से सोचें, जो आपने गलत कीं ताकि आप भविष्य में उनसे बच सकें ।।

1. कहीं न कहीं, कोई और आपसे कम खुश है

यहां तक ​​कि अगर आपने गड़बड़ की है, तो भी कुछ चीजें हैं जिन्हें आपने पूरा किया है ।।

2. एक सकारात्मक रवैया आपकी सभी समस्याओं को हल नहीं कर सकता है, लेकिन यह पर्याप्त लोगों को इसे लायक बनाने के लिए परेशान करता है

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खुद को पीटने से कुछ नहीं बदलेगा । इसके बजाय, खुद को माफ करने की कोशिश करें ताकि आप आगे बढ़ सकें।

3. ना कभी शिकायत करो, ना कभी समझाओ । अपने बचाव के लिए बहाने बनाने वाले प्रलोभनो से बचें

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सकारात्मक विचारों के साथ भविष्य की ओर देखते हुए अतीत से सीखें ।।

4. सुबह में एक छोटा सा सकारात्मक विचार आपके दिन के पूरे परिणाम को बदल सकता है  

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चाहे कितनी भी बुरी चीजें हों, आपके जीवन में हुई सभी अच्छी चीजों के लिए हमेशा आभारी रहें।

5. आज आप जहां भी जाएं, अपने दिल में शांति, प्रेम और सद्भाव का भाव लेकर चलें

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जिन कारणों से आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, उनकी गणना करें।

6. आपकी मुस्कुराहट आपको एक सकारात्मक काउंटेंस देगी जो लोगों को आपके आस-पास सहज महसूस कराएगी

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अपने नकारात्मक विचारों को सकारात्मक लोगों के साथ बदलें ताकि आप सकारात्मक परिणामों का आनंद ले सकें।

7. सकारात्मक मन, सकारात्मक जीवन, सकारात्मक जीवन

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जीवन के सकारात्मक पक्ष को देखें लेकिन यथार्थवादी बनें और इस तथ्य को स्वीकार करें कि जीवन कभी-कभी जटिल भी हो सकता है। हमेशा एक सकारात्मक दृष्टि विकसित करें।

8. रात को दिन की चिंताओं और आशंकाओं को समाप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है

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सकारात्मक सोच आपको नकारात्मक सोच से बेहतर कुछ भी करने दे सकती है।

9. विफलताएँ जीवन का हिस्सा हैं यदि आप असफल नहीं होते हैं, तो आप सीखते नहीं हैं। यदि आप नहीं सीखेंगे तो आप कभी नहीं बदलेंगे

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सकारात्मक विचार अंधकार को प्रकाश में बदल सकते हैं। रचनात्मक विज़ुअलाइज़ेशन का उपयोग करके अपने सपनों को वास्तविकता में बदलें।

10. कैसे सकारात्मक रहें – “मैं नहीं कर सकता” के बजाय “मैं कर सकता हूं” कहो, अधिक मुस्कुराओ। आशावादी बनो

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सकारात्मक विचार आपको बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित रिश्तों का आनंद दे सकते हैं।

11. आपका सबसे अच्छा शिक्षक आपकी आखिरी गलती है

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आपकी खुशी पूरी तरह से आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी। जब आप चुनौतियों का सामना कर रहे होते हैं, तब भी आपके जीवन में थोड़ा हास्य होना जरूरी है।

12. खड़ी पहाड़ियों पर चढ़ने के लिए पहले धीमी गति की आवश्यकता होती है

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जिस प्रकार पहाड़ी पर चढ़ने तक धीमी गति से कदम उठाने चाहिए। उसी प्रकार छोटे छोटे सकारात्मक विचार आपके समस्त जीवन का कल्याण कर सकते हैं|

13. मुझे अपना जीवन बनाने में मदद करने के लिए धन्यवाद

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यह आपकी गलतियों पर ध्यान देने के लिए ललचाता है, लेकिन अभी आप केवल यही कर सकते हैं कि इससे सीखें और आगे बढ़ें।

14. हर एक दिन अपने के अंदर युद्ध से लड़ने में लिए थकावट होती है

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सही रवैये को अपनाने से आपके नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में परिवर्तित किया जा सकता है। सुधार के मुकाबले प्रोत्साहन बहुत बेहतर है।

15. जो आपके पास नहीं है उसके बारे में सोचने के बजाय आपके पास क्या है, इसके बारे में सोचने की कोशिश करें

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हमेशा विश्वास रखें कि आपका जीवन जीने के लायक है। यदि आपका मन हमेशा नकारात्मक हो, तो आप कभी भी सकारात्मक जीवन नहीं जी सकते।

16. मत छोड़ो!!! जब चीजें गलत हो जाती हैं, जैसा की हम अक्सर करते हैं

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एक बार जब कोई नकारात्मक विचार आपके दिमाग में प्रवेश करता है, तो आपको उसे तुरंत एक रचनात्मक विकल्प के साथ बदलना होगा।

17. अपने विचारों को बदलें और आप अपनी दुनिया को बदल दें

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सकारात्मक दृष्टिकोण रखने से आपके जीवन में खुशियाँ आ सकती हैं।

काश!!! तू इतनी सी..

काश!!! तू इतनी सी मोहब्बत निभा दे, जब भी मैं रूठू तो तू मुझे मना ले …
Kaash!!! tu itni si Mohabbat nibhaa de, Jab bhi main Ruthoo to tu mujhe mnaa le…

Insaniyat ka koi Dharm nahi..

इंसानियत(Insaniyat) खुद में एक धर्म(Dharm) है, इसे हम धर्म(Dharm) अलग नहीं कर सकते बिना इंसानियत(Insaniyat) के धर्म (Dharm) ऐसे है जैसे बंजर भूमि जिसमे जितना भी बीज डालते जायो खेती कभी भी हरी-भरी लहलहा नहीं सकती |जो पूजा हम भगवान के चरणों में  करते हैं वो केवल द्रव्य पूजा है| पर  अगर  किसी जीते जागते इंसान की सेवा करते हैं वो भाव किसी पूजा से कम नहीं| भगवान् के चरणों में जल घंटे भर बाद भी चढ़ा दे तो को फर्क नहीं पड़ेगा पर यदि किसी प्यासे को पानी १ घंटे बाद पिलाओगे तो वो मर भी सकता है सो हमेशा ध्यान दे जिस कर्म  की आवश्यकता सबसे पहले करने  की है वही धर्म(Dharm) है और इंसानियत (Insaniyat)भी…..

Instaniyat

“एक किस्सा आपसे शेयर करती हु संक्षेप में बात तो बहुत छोटी सी है बस भाव बताना चाहती हु.. मैं एक दिन गुरद्वारा साहेब जा रही थी माथा टेकने हाथ में कुछ फ्रूट्स पकडे हुए थे जो मुझे बाबा जी के चरणों में रखने थे (क्योंकि उस मौसम के वो पहले फ्रूट्स थे जो भगवान को भोग लगाकर ही शुरू करने थे) और मेरी माता जी की इच्छा थी के ऐसा ही हो.. लो जी गुरद्वारा साहेब आ गया जो घर से कुछ दुरी पर ही था| अभी  मैंने पहली सीढ़ी पर कदम रखा ही था की सामने से एक गरीब छोटा सा बच्चा आते हुए देखा अपनी माँ के साथ मटमैले कपड़ो में जो शायद इस भरी गर्मी में गुरद्वारे से ठंडा पानी पीने आया था तभी अचानक मेरे मन में क्या आया की  मैंने उससे पूछा बच्चे फल खाओगे उसने अपनी माँ की तरफ देखा और मुस्कुरा कर सर हिलाया.. मैंने हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और वो पैकेट उसे पकड़ा दिया वो ख़ुशी ख़ुशी माँ के साथ अपने घर चला गया| उस पल एक अदभुद सी ख़ुशी हुई क्योंकि मुझे लगा मैंने वो चीज़ सही जगह पर दी जिसे असल में उसकी ज़रूरत थी शायद ..”

Instaniyat

 इंसानियत(Insaniyat)ही  पहला  धर्म(Dharm)  है  इंसान  का,
फिर  पन्ना  खुलता  है  गीता  या  कुरान  का.. ||

अब यदि आप गहरायी में जानना चाहते हैं के इंसानियत(Insaniyat) है क्या तो आइये इसके विषय में भी चर्चा कर लेते हैं..

इंसानियत(Insaniyat) यानी मानवता(Insaniyat), फिर चाहे वो किसी भी देश का हो, किसी भी जाति का हो या फिर किसी भी शहर का हो सबका एकमात्र प्रथम उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनने का होना चाहिए। हर किसी इंसान के रंग रूप, सूरत, शारीरिक बनावट, रहन-सहन, सोच-विचार और भाषा आदि में समानतायें भी होती हैं और असमानताएं भी होती हैं, लेकिन ईश्वर ने हम सभी को पाँच तत्वों से बनाया है। हम सभी में इस परमात्मा का अंश है। आज के इस दौर में इंसान मानवता(Insaniyat) को छोड़कर, इंसान के द्वारा बनाये गए धर्मों के भेद-भाव के रास्ते पर निकल पड़ा है। जिसके चलते एक इंसान किसी दूसरे इंसान की ना तो मज़बूरी समझता है और ना ही उसकी मदद ही करता है। यहाँ पर इंसानियत(Insaniyat) पर धर्म(Dharm) की चोट पड़ती है। लोग इंसानियत(Insaniyat) को छोड़कर अपने ही द्वारा रची गई धर्मों (Dharm)की बेड़ियों में जकड़े जा रहे हैं। इंसान धर्म(Dharm) की आड़ में अपने अंदर पल रहे वैर, निंदा, नफरत, अविश्वास, उन्माद और जातिवादी भेदभाव के कारण अभिमान को प्राथमिकता दे रहा है। जिससे उसके भीतर की मानवता(Insaniyat) धीरे धीरे दम तोड़ रही है। इंसान प्यार करना भूलता जा रहा है, अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और तो और अपने परमपिता परमात्मा को भी भूल गया है। इन सबके चलते मानव के मन में दानवता का वास होता जा रहा है।Motivation

भगवन इंसानियत (Insaniyat)में बस्ते हैं,
और   लोग   मज़हबो(Dharm) में   ढूंढ़ते   हैं ||

आज धर्म(Dharm) के नाम पर लोग लहू-लुहान करने से पीछे नहीं हटते जिससे संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। आज इंसान- इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है क्योंकि वो पराये धर्म(Dharm) से है। लोगों का मूल उद्देश्य अपना स्वार्थ सिद्ध करना हो गया है किसी को पैसे का स्वार्थ है तो कोई ओहदे को लेकर और तो कोई एक तरफ़ा प्यार के स्वार्थ में अँधा है। इसी के चलते मानव इंसानियत (Insaniyat)को अपने जीवन से चलता कर देते हैं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है- ”इंसान इंसान को डस रहा है और साँप बैठकर रो रहा है”

यही वो इंसान है जो अब सिर्फ ‘मैं’ शब्द में ही उलझकर रह गया है और इसी में जीना चाहता है। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर प्रतीत होता है कि ‘मरते हैं इंसान भी और अब मर रही है, इंसानियत'(Insaniyat)। कुछ घटनाओं को देखें तो लगेगा कि इंसानियत (Insaniyat)तार तार हो रही है। एक घटना अनुसार सड़क हादसे में  मौत से जूझते हुए एक इन्सान को भी लोगों ने यूँ ही सड़क पर छोड़ दिया मरने के लिए। किसी ने उसकी मदद करनी नहीं चाही। यह जरूर किया कि उस इंसान के दर्द से तड़पने की वीडियो बनाई और उसको सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया ताकि उस मरते हुए इंसान के साथ साथ मर रही इंसानियत(Insaniyat) का चेहरा भी देखा जा सके। लोग आज भी यही सोचते हैं कि अगर ऐसी घायल अवस्था में वो किसी को अस्पताल ले जाते हैं तो उनको कानूनी कार्यवाही के झंझट में पड़ना होगा। मैं समझती हूँ कि यहाँ लोगों में जानकारी का आभाव है, उनको यह नहीं पता कि ऐसे किसी भी घायल इंसान को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम नहीं बताने की छूट है। यहाँ तक कि सरकार ने आपातकालीन सुविधा भी उपलब्ध कराई है ताकि किसी को भी घायल व्यक्ति के इलाज़ का भार ना उठाना पड़े। एक ये भी वजह है जो लोग किसी दूसरी की मदद करने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं इन सब का असर उनकी जेब और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर ना पड़े।Motivation

 ज़रूरी  नहीं  जिसमे  सांस  नहीं  वही  मुर्दा  है,
जिसमे इंसानियत (Insaniyat) नहीं  वो  भी तो मुर्दा ही  है ||

निष्कर्ष में मैंने यही पाया है कि चाहे बात किसी जाति के विवाद की हो या बात किसी इंसान की मदद न करने की हो या फिर धर्म(Dharm) के नाम पर इंसान को इंसान के खिलाफ करने की हो, इन सभी में शिक्षा का अभाव है, समझ की कमी है और अपना खुद का स्वार्थ है क्योंकि अब इंसानों में “मै” शब्द का अभिमान बढ़ता जा रहा है। यह अभिमान जब तक हममें रहेगा तब तक उपरोक्त घटनाओं का जो विवरण दिया गया है वैसे किस्से सुनने को मिलते रहेंगे। इंसानियत(Insaniyat) कुछ रुपयों को लेकर, अपने लालच और अपने लोभ व लालसा को लेकर ऐसे हर बार शर्मसार होती रहेगी। हम लोगों को अपने संस्कारों को अपनी शिक्षा पर अमल करने की जरूरत है। मैं यह नहीं मानती की कोई भी धर्म(Dharm) या मज़हब इंसानियत (Insaniyat)को मारने के लिए कहता होगा तो क्यों ना हम यह शुरुआत अपने परिवार से करें अपने परिवार को समय देकर उनका हमारे जीवन में महत्त्व को समझें। अगर शुरुआत अपने घर से  होगी  तभी तो सामाजिक तौर पर इंसानियत(Insaniyat) को ला  पाएंगे।

मरते  थे   इंसान  कभी  पर, अब  मर  रही  है   इंसानियत,  Instaniyat
पैसे  सत्ता  और  ताकत  के  लालच में आ गई है, हैवानियत
धर्म और मज़हब का ढोल बजा के लहू लुहान किया इंसानों को,
जाति, धर्म  का  लालच  देके   झोंक  दिया   इंसानियत  को,
मार  दिया  उस  प्यार  को  और  उसके  प्यारे  एहसास  को,
जप  रहा   है   जाप   बस   “मैं”   शब्द     के     नाम   को,
दया  की  भावना  तो  चली गई, ना ही अपनों का अब दर्द रहा,
देख  ख़ुशी  दूसरों   की  आज  का  इंसान   क्यों  जल   रहा,
कैसा   युग   है,  और   क्या   समय   की   मार   है,   प्यारे
इंसान   इंसान  को  डस  रहा  और  साँप  बैठकर  रो   रहा।।

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क्रोध – “क्रोध एक तरह का पागलपन है”

क्रोध आखिर है क्या? आइये जाने इसके बारे में

मैंने बहुत बार इस बारे में सोचा के आखिर गुस्सा/क्रोध है क्या? और क्यों आज हर दूसरा तीसरा इंसान इससे परेशान है.. और सब जानते हुए भी के इसके क्या-क्या नुकसान है चाह कर भी इससे निजात नहीं पा पाता.. चलिए इस बारे में गहरायी से जानने की कोशिश करते हैं..

आज सभी चाहते हैं के हमारा घर स्वर्ग बन जाये खासकर औरते पायी पायी बचा कर घर का डेकोरेशन का सामान बनाती हैंकयोंकि घर को  स्वर्ग बनाना चाहती हैं लेकिन जब आपकों क्रोध आता है तो वो सब होकर भी आपका क्रोध उसे नरक बना देता है और नरक में कोई रहना नहीं चाहता| सारी मेहनत पर आपका क्रोध पानी फेर देता है आपने जो मेहनत करके स्वर्ग बनाया होता और नरक ऐसी जगह होती है जहा कोई भी रहना नहीं चाहता है इसलिए सरे सुख के साधन होते हुए भी फिर भी सुख हमको मिलता नहीं है क्योंकि क्रोध हमारे उस सुख का नाश कर देता है इसलिए ऐसी भयंकरऔर खतरनाक चीज़ जो हमें स्वर्ग से नरक में ले आये उसे निकल दें अपने जीवन से.. और हम में से भी कई लोगो ने यह महसूस किया होता है के जिस-जिस घर में क्रोध हो रहा है इस समय वहां बच्चे से लेकर बड़े तक बेज़ार हैं सिर्फ किसी एक व्यक्ति के क्रोध के कारण पूरा घर जल रहा होता है यदि हम अपने जीवन में अपनी इच्छाओं को शांत करले, जो हो गया वो  ठीक है और किसी ने कह दिया तो भी ठीक है|हम में से ही कुछ लोग ऐसे होंगे जो क्रोध की सज़ा भुगत रहे होंगे..ऐसे क्रोध को हम क्यों नहीं त्याग देते जो माँ बेटे को अलग कर  देता है पति और पत्नी को भाई-भाई को अलग करवा  देता  है| हम क्यों नहीं शुक्र करते हैं भगवान का की जो हुआ बहुत अच्छा हुआ.. कई औरते पति के लेट आने पर अक्सर झगड़ा करती हैं पर यह क्यों नहीं समझती के पति लेट आया तो  भी भगवान का  शुक्र करे की आया तो सही… तो फिर गुस्सा आएगा ही नहीं अगर आता ही नहीं  तो क्या करते??? उन्हें समझना चाहिए अगर वो पति ही न रहे तो किस परगुस्सा करेंगे|  आदमी लोग अपनी पत्नियों पर क्रोध करते हैं के यह क्या बनाया मायके वालो ने कुछ सिखाया नहीं.. अगर पत्नी  ने दाल चावल बनाये तो भी शुक्र करे के मिले तो सही ऐसे बी लोग हैं जिन्हे सूखी रोटी तक भी नसीब नहीं होती तो क्रोध आएगा ही नहीं | इसलिए अपने ऐसे शत्रु को घर से निकल फेंके जो आपके घर में अशांति ही अशांति फैला देता है क्यांकि  क्रोधवश आप तो डूबोगे ही पर आपके  साथ  पूरे  परिवार को डूबना पड़ता है कभी कभी पति- पत्नी का झगड़ा होता है  पत्नी अपने ऊपर केरोसीन डाल लेती है खुद तो मर जाती है  पर बच्चो को दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं|  कभी सोचा है के हमारे छोटे बचो का क्या कसूर होता है  के आपके क्रोध की सज़ा आपके बचो को भुगतनी पड़ती है| कई औरते  तो ऐसी  भी होती हैं को जो क्रोध में जलने को तो त्यार हो जाती हैं परन्तु जल कर फिर वापिस बच जाती हैं  हाथ खराब हो जाता है चेहरा खराब हो जाता है जमाने की हंसी का कारन बनकर रह जाती हैं.. कई लोग ऊपर से तो गिरने को गिर जाते हैं परन्तु बच जाते हैं पर टाँगे कटवा देते, हाथ कटवा देते हैं, जुबान रह जाती है और ज़माने में मज़्ज़ाक़ का कारन बनकर रह जाते हैं सिर्फ  कुछ देर के  क्रोध के कारण | इसलिए क्यों न हम अपने जीवन को सरल बनाएं कोम्प्रोमाईज़ की आदत डाले.. इसलिए जो भगवान करता है वो अच्छा करता है  याद रखो के हमारा ईश्वर कभी भी हमारे लिए बुरा नहीं करेगा उसके हर काम में हमारी भलाई होती है हम ही हैं जो समझ नहीं पाते लेकिन जब परिणाम आता है तो पता लगता है के भगवान तुम ही सही थे | इसी बात पर मुझे एक कहानी याद आ गयी..

“जैसे एक आदमी था उसे कही भी नौकरी नहीं मिलती थी वो दर-दर भटकता था उसे कोई भी नहीं रखता था उसे लगता मैं सबसे बड़ा अभागी हु उसे जो भी  मिलता वो उसे कहता के तुम्हारे भगवान ने देखो मेरे साथ आज तक कभी अच्छा नहीं किया  देखो मुझे बचपन से लेकर अब तक सर्फ दुःख ही दुःख दिए,उसने मेरे साथ हमेश बे इंसाफ़ी ही की है  वो हर वक़्त ऊपर वाले को कोसता ही रहता|ऐसे करते करते एक दिन उसे दुबई में जॉब लग गयी उसमे अहंकार आ गया के मेरे भाग खुल गए अब मैं दुबई जाऊंगा बहुत कमाऊंगा मुझे भगवान की क्या ज़रूरत.. ऐसे ही जॉब का दिन भी आ गया उसकी फ्लिघ्त थी अगले दिन दुबई की इसलिए वो सुबह जल्दी उठा टैक्सी ली और भगा एयरपोर्ट की और पर रस्ते में टैक्सी का एक्सीडेंट हो गया और उसकी फ्लाइट निकल गई  उसने फिर से भगवान को कोसना शुरू क्र दिया देखा तुम तो कभी मेरा अच्छा होते हुए देख ही ही सकते मुंह तक आया हुआ नेवाला छीन लिया और आपकी किस्मत को फिर से कोसने लगा..  घर वापिस आया  और मुंह उतर क्र बैठ गया तभी उसे पता चला के जिस फ्लाइट में वो जाने वाला था उस फ्लाइट का टेक ऑफ करते ही क्रैश हो गया  और सब के सब यात्री मरे गए.. तब उसने भगवान का शुक्र किया ||”

क्रोध का नुकसान

क्रोध करने को तो आप एक पल के लिए करते हैं पर बाद में सारा दिन आपका कलप कलप कर जाता है|  क्रोध के बाद हम पश्चाताप करते हैं के मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था यह गलत हो गया मुझसे या ज़्यादा कह दिया मैंने.. काश मैंने क्रोध न किया होता कई बार आप ऐसा काम कर जाते हैं क्रोधवश के जिसकी वजह से हमें सारी उम्र रोना पड़ता है क्योंकि क्रोध अँधा होता है, क्रोध बहरा होता है, क्रोध पागल होता है, वो नहीं देखता है के सामने माँ है पिता है या बच्चा है और उस क्रोध की सज़ा तो हमको मिलती ही है  पर हमारे पूरे परिवार  को भी भुगतनी पड़ती  है | याद रखिये चूल्हे की अग्नि तो पानी डालने से बुझ जाती है पर हमारे अंदर क्रोध की अग्नि सब जलाने के बाद ही बुझती है क्रोधी व्यक्ति हमेशा अंदर ही अंदर जलता ही रहता है यह अग्नि कभी बुझती नहीं |

“एक गाँव में एक साधु आये उनकी बहुत ख्याति थी के वह बहुत दिगंबर साधु महात्मा हैं, वो कहते थे के मैंने अपने आप को जीत लिया  है इसलिए वो अग्नि के सामने बैठ कर तपस्या करते थे और कहते थे के यह अग्नि मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती | उसी गाँव में एक और विवेकी संत आये उन्होंने सोचा के यह संत कहते हैं के यह अग्नि मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकती तो ज़रा देखु के इनके अंदर सच में अग्नि बची है के नहीं| इसलिए जब वो तपस्या करके बैठे तो अग्नि सारी बुझ गई थी तो विवेकी संत ने  कहा महाराज आप कृपा करके थोड़ी अग्नि मुझे देदें.. उस साधु ने कहा के अब तो अग्नि बुझ चुकी है आप कल आएं| तो विवेकी साधु चले गए और  फिर थोड़ी देर बाद वो वापिस आये और कहा महाराज अग्नि है ? उन्होंने फिरसे कहा अभी तो कहा अग्नि बुझ चुकी है और वो संत  वापिस चले गए.. इसी प्रकार वो विवेकी संत 5 से 10 मिंट बाद फिर वापिस आये और कहने लगे के महाराज अग्नि है..?? साधु क्रोध में आकर कहने लगे के तुम्हे एक बार में सुनाई नहीं देता.. पागल हो क्या.. अभी तो कुछ देर पहले बताया के अग्नि बुझ चुकी है.. तभी उस विवेकी संत ने मुस्कुरा कर कहा के महात्मा अभी अग्नि कहा बुझी है? अग्नि तो आपके अंदर जल रही है अभी क्रोध रुपी अग्नि, लकड़ियों की अग्नि बुझने से क्या होगा.. “

कुछ अन्य नुक्सान..

  1. गुस्सा करने वाला व्यक्ति दूसरे का नुकसान कर पाये या नहीं लेकिन खुद का नुकसान तो जरूर कर लेता है। इससे उस व्यक्ति कोहृदय रोग,डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, नींद नहीं आना, मानसिक तनाव, प्रतिरोधक क्षमता में कमी आदि बीमारियाँ होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  2. इसके अलावा इस स्वाभाव के कारण उस व्यक्ति काकैरियर पीछे रह जाता है , उसके रिश्ते टूट कर बिखर जाते है। वह व्यक्ति खुद अपनों के दिल पर ऐसे घाव बना देता है जो कभी भर नहीं पाते।
  3. गुस्सा करने वाले व्यक्ति केअपने परिवार वाले भी उस पर विश्वास नहीं कर पाते , कोई उनसे आराम से बात नहीं कर पाता , ईमानदारी से सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते , विशेषकर बच्चों के लिए तो यह अनुभव भयानक होता है जो जिंदगी भर उनका दिल दुखाता है।

क्रोध पर नियंत्रण कैसे पाएं

आप अपने क्रोध को कण्ट्रोल करे अपने लिए नहीं अपने परिवार के लिए  अपने बच्चो के लिए..इसके लिए  शुक्र करना और सबर करना सीख ले और जब सबर और शुक्र करना आप सीख जाएं तो इच्छा कम हो जाएगी| सो गुस्से को कण्ट्रोल करने का सीधा रास्ता है इच्छा पर नियंत्रण करना| जब आप को गुस्सा आता है तो कुछ देर के लिए तो आपको बहुत अच्छा लगता है कुछ देर के लिए तो आप खुद को राजा समझते हो के देखा मेरे आगे कोई नहीं बोलता मैंने सबको चुप करवा दिया.. पर याद रखना क्रोधी व्यक्ति के पीठ पीछे सब लोग उनका मज़्ज़ाक़ उड़ाते हैं मुंहे बुरा भला कहते हैं  क्रोध करते हैं क्योंकि क्रोधी इंसान को कोई पसंद नहीं करता | मुँह पर तो तारीफ करते हैं पर बुराई शुरू क्र देते हैं आपके जाते ही, अगर हम सब अपने क्रोध पर नियत्रण करे तो सारा घर बच जाएगा वरना सारा घर जल जाएगा आपके क्रोध से| कुछ और ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें..

  1. आप दूसरे लोगों कोया परिस्थितियों को नहीं बदल सकते जो आपको गुस्सा दिलाते हैं लेकिन ऐसे में खुद में बदलाव लाने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।
  2. आपको भी महसूस होने लगता है कि गुस्सा आने परआप पर एक ताकतवर और अप्रत्याशित चीज हावी हो जाती है जो आपको नुकसान पहुंचाती है , अतः इसे कतई हावी ना होने दें।
  3. गुस्सा करने से पहले एक बार सोचें – क्या इस बात या स्थितिके लिए गुस्सा करना ठीक है ? क्या गुस्सा करके बचा हुआ दिन बर्बाद करना सही होगा ? क्या कोई दूसरा उपाय हो सकता है ? क्या यह कीमती समय का सदुपयोग है ?

क्रोध रोके रुका ही नहीं

क्रोध रोके रुका ही नहीं   
मुठ्ठियों में बँधा ही नहीं

कैसे मंज़िल पे पहुँचेगा वो
आजतक जो चला ही नहीं

बाँटते-बाँटते कर्ण की
गाँठ में कुछ बचा ही नहीं

कितने सालों से घर में कोई
खिलखिलाकर हँसा ही नहीं

एड्स या कैंसर की तरह
शक की कोई दवा ही नहीं

जो लिपट न सकी पेड़ से
सच कहूँ वो लता ही नहीं

ऋण सभी पर रहा साँस का
मरते दम तक चुका ही नहीं

 

 

Positive Thoughts-“the key to Happiness”

Positive thoughts can let you focus on the brighter side of life. A positive person can enjoy happiness and success since he believes that he can easily overcome all the obstacles and difficulties that come his way. Not all people generally agree with positive thinking. In fact, some people consider it as nonsense. However, there are a number of people who believe in its effectiveness. If you want to use this in your life then you must practice the attitude of positive thinking in everything that you do.

How To Think Positive Thoughts

Sometimes even the most effective medicine is not sufficient for a complete recovery. If you are dealing with sickness or major life transformation then here are some ways that can help you to channel your negative thoughts into positive outlooks.

  • When talking, try to use positive words only: If you keep on telling yourself “I can’t” then you might persuade yourself that this is the truth. Try to tell yourself “I will do my best” instead.
  • Push your negative feelings away and stay focused on the positive things in life: When you’re feeling down, don’t get overwhelmed by those negative thoughts.
  • Fill your thoughts with words that invoke strength and success: Focus on words that can make you happy and strong instead of those that can make you feel incompetent.
  • Create a positive affirmation on your mind: One of the best positive thoughts is to tell yourself “I deserve to be happy.” Believing that this is a reality can give you a positive outlook on life.
  • When you start feeling anxious, direct yourself to happy thoughts: Create a positive image in your mind to boost positivity and avoid bad feelings.
  • Always believe that you can succeed: Give yourself the benefit of the doubt by believing that you will succeed in accomplishing your goals.

Instead of getting stuck in negativity, turn to these fewest positive thoughts and quotes for the day to get you going.

Positive thoughts are the key to happiness. Start your morning with one small positive to motivate you throughout the day. Positive thoughts and prayers are very helpful during the difficult times of our lives. Always think positive!

Beautiful Positive Thoughts of the Day

Thinking positively does not mean that you have not committed any mistakes. Think carefully about the things that you did wrong so that you can avoid them in the future.

1. Somewhere, someone else is happy with less than you have.

Even if you’ve messed up, there are also some things that you’ve accomplished.

2. A positive attitude may not solve all your problems, but it annoys enough people to make it worth.

Beating yourself will not change anything. Instead, try to forgive yourself so that you can move on.

3. Never complain, never explain. Resist the temptation to defend yourself or make excuses.

Learn from the past by looking forward to the future with positive thoughts.

4. One small positive thought in the morning can change the entire outcome of your day.

Regardless of how bad things are, always be grateful for all the good ones that happened in your life.

5. Today, wherever you go, carry the intention of peace, love, and harmony in your heart.

Enumerate the reasons why you want to achieve your goal.

6. Your smile will give you a positive countenance that will make people feel comfortable around you.

Substitute your negative thoughts with positive ones so you can enjoy positive outcomes.

7. Positive mind, positive vibes, positive life.

Look on the positive side of life but be realistic and accept the fact that life can also be complicated sometimes. Always develop a positive vision.

8. Night is designed to end the worries and fears of the day.

Positive thinking can let you do anything better than negative thinking does.

  1. Failures are part of life; If you don’t fail, you don’t learn. If you don’t learn you’ll never change.

Positive thoughts can transform darkness into light. Turn your dreams into reality by using creative visualization.

10. How to be positive – Say “I can,” instead of “I can’t!” Smile more. Be optimistic.

Positive thoughts can let you enjoy better health and secure relationships.

  1. Your best teacher is your last mistake.

Your happiness will entirely depend on the quality of your thoughts. Even when you are confronting challenges, it is also important to have a little humor in your life.

  1. To climb steep hills requires a slow pace at first.

Take one slow step at a time until the hill is climbed. Positive thinking can enhance your overall well-being.

  1. Thank you for helping me build my life.

It’s tempting to dwell on your mistakes but the only thing that you can do right now is to learn from it and move forward.

  1. It’s exhausting to fight a war inside your head every single day.

Embracing the right attitude can convert your negative thoughts into positive ones.Encouragement is much better than correction.

  1. Instead of thinking about what you’re missing, try thinking about what you have…

Always believe that your life is worth living for. You can never have a positive life if your mind is always negative.

  1. Don’t quit. When things go wrong, as they sometimes will.

Once a negative idea enters your mind, you have to substitute it with a constructive one instantly.

  1. Change your thoughts and you change your world.

Having a positive attitude can bring happiness into your life.

Jeevan-“the less u Expect, more u Happy”

“ज़िन्दगी कभी आसन नही होती इसे आसान करना पड़ता है,कुछ नजर अंदाज करके कुछ बर्दास्त करके..”

जीवन का अर्थ क्या है

जीवन का अर्थ क्या है? मैं जीवन में उद्देश्य, पूर्णता तथा सन्तुष्टि कैसे खोज सकता हूँ? क्या मैं किसी बात के चिरस्थायी महत्व की प्राप्ति कर सकता हूँ? बहुत सारे लोगों ने इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के ऊपर सोचना कभी नहीं छोड़ा है। वे सालों पीछे मुड़कर देखते हैं और आश्चर्य करते हैं कि उनके सम्बन्ध क्यों नहीं टूटे और वे इतना ज्यादा खालीपन का अहसास क्यों करते हैं, हालाँकि उन्होंने वह सब कुछ पा लिया जिसको पाने के लिए वे निकले थे। एक खिलाड़ी जो बेसबाल के खेल में बहुत अधिक ख्याति के शिखर पर पहुँच चुका था, से पूछा गया कि जब उसने शुरू में बेसबाल खेलना आरम्भ किया था तो उसकी क्या इच्छा थी कि कोई उसे क्या सलाह देता। उसने उत्तर दिया, “मेरी इच्छा थी कि कोई मुझे बताता कि जब आप शिखर पर पहुँच जाते हैं, तो वहाँ पर कुछ नहीं होता।” कई उद्देश्य अपने खालीपन को तब प्रकट करते हैं जब केवल उनका पीछा करने में कई वर्ष व्यर्थ हो गए होते हैं ।हमारी मानवतावादी संस्कृति में, लोग कई उद्देश्यों का पीछा, यह सोचकर करते हैं कि इनमें वे उस अर्थ को पा लेंगे। इनमें से कुछ कार्यों में: व्यापारिक सफलता, धन-सम्पत्ति, अच्छे सम्बन्ध, यौन-सम्बन्ध, मनोरंजन, दूसरों के प्रति भलाई, वगैरह सम्मिलित है। लोगों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि जब उन्होंने धन-सम्पत्ति, सम्बन्धों और आनन्द के लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया, तब भी उनके अन्दर एक गहरी शून्यता थी, खालीपन का एक ऐसा अहसास जिसे कोई वस्तु भरती हुई प्रतीत नहीं होती।

बाइबल की सभोपदेशक नामक पुस्तक के लेखक ने इस बात का एहसास किया जब उसने कहा, “व्यर्थ ही व्यर्थ! व्यर्थ ही व्यर्थ ! …सब कुछ व्यर्थ है” | राजा सुलेमान के पास, जो सभोपदेशक का लेखक है, परिमाप से परे अथाह धन-सम्पत्ति थी, अपने या हमारे समय के किसी भी व्यक्ति से ज्यादा ज्ञान था, सैकड़ों स्त्रियाँ थीं, कई महल और बगीचे थे जो कि कई राज्यों की ईर्ष्या के कारण थे, सर्वोत्तम भोजन और मदिरा थी, और हर प्रकार का मनोरंजन उपलब्ध था। फिर भी उसने एक समय यह कहा कि जो कुछ उसका हृदय चाहता था, उसने उसका पीछा किया। और उस पर भी उसने यह सार निकाला कि, “सूरज के नीचे” – ऐसा यापन किया हुआ जीवन जैसे कि जीवन में केवल यही कुछ हो जिसे हम आँखों से देख सकते हैं और इन्द्रियों से महसूस कर सकते हैं – व्यर्थ है! ऐसी शून्यता क्यों है। क्योंकि परमेश्वर ने हमारी रचना आज-और-अभी का अनुभव करने के अतिरिक्त किसी और वस्तु के लिए भी की थी। सुलेमान ने परमेश्वर के विषय में कहा, “उसने मनुष्यों के मनों में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान रखा” अपने हृदयों में हम इसबात को जानते हैं कि केवल “आज-और-अभी” ही सब कुछ नहीं है।

जीवन का  उद्देश्य

साधारण शब्दों में  इस संसार में अनेक प्रकार के लोग हैं जो अपनी जिंदगी अपने सोच के आधार पर जी रहे हैं ! हर कोई जिंदगी के दौड़ में सामिल है ! एक दुसरे को पछाड़ना ही जिंदगी का मक़सद बन गया है ! आज किसी के पास वक़्त नहीं है ! अपनों के लिए भी नहीं ! सब जिंदगी जी रहे हैं , लेकिन कहीं सुकून नहीं  कहीं शान्ति नहीं ! परमात्मा के बारे में जानने का बात तो दूर , आज कल तो परमात्मा भी शक के दायरे में है ! परमात्मा एक से कई बन गए हैं ! अब तो इस बात पर लड़ाई होती है कौनसा परमात्मा श्रेष्ठ है?

शांत और सुकूनभरा जीवन

आदमी कितना जीता है? 70 या 80 साल। बहुत अच्छी सेहत हुई तो 100 साल। इन 100 वर्षों में वह प्रारंभिक 25 वर्ष तो संसार, खुद को समझने और करियर बनाने में ही लगा देता होगा। अगले 25 वर्ष वह गृहस्थ जीवन के संघर्ष में गंवा देता होगा और अंत में सोचता होगा कि अब जिया जाए…  किन्तु अब जीने के लिए बचा क्या….. ? शांत और सुकूनभरा जिंदगी के लिए हमें क्या करना चाहिए ? नीचे दिए गए पंक्तियाँ में एक पागल के मुँह से सुना था !

  •          इस तरह न कमाओ कि पाप हो जाये
  •          इस तरह न खर्च करो कि क़र्ज़ हो जाये
  •          इस तरह न खाओ कि मर्ज़ हो जाये
  •          इस तरह न बोलो कि क्लेश हो जाये
  •          इस तरह न चलो के देर हो जाये
  •          इस तरह न सोचो कि चिंता हो जाये

लेकिन आजकल  मनुष्य इसका  बिपरीत करता है ! कभी कभी में सोचती हूँ  पागल कौन है ?

मनुस्य कि जिंदगी एक अहम् वरदान है ! यह एक अमूल्य अवसर है परमात्मा के बारे में जानने का! यह अवसर को गवाना सब से भारी नुक्सान है !इंसान को नमक कि तरह होना चाहिए, जो खाने में रहता है तो दिखाई नहीं देता और अगर न हो तो उसकी कमी महसूस होता ! मनुष्य के जिंदगी का अर्थ तब पूरा होगा जब वह किसी और के काम आये !

मनुष्य के जिंदगीं का उद्देस्य परमात्मा को जानना है ! इस मक़सद के लिए इंसान को कोशिश करनी चाहिए ! हमें सब से पेहेले एक अच्छा इंसान बनना चाहिए ! इसमें अनेक बाधाएं आएंगी ! लेकिन लगातार कोशिश ही सफलता लाती है ! धीरे धीरे बहती हुई एक धारा पत्थर में छेद कर देती है !  निरंतर प्रयास होना चाहिए ! किसी मक़सद के लिए खड़े हो तो पेड़ कि तरह खड़े रहो ! और गिरना है तो गिरो बीज कि तरह ताकि दोबारा उग सको उस मक़सद को पूरा करने के लिए ! गिरने से हार नहीं होती , हार तब होती है जब और कोशिश नहीं होती !

जीवन के अर्थ के विषय में जीवनशास्त्रियो में सदैव ही मतभेद रहे हैं अन्य जीवनशास्त्रियो के अनुसार.. जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है , संघर्ष ही जीवन है । । इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं । जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया । जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ । तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है । जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता । जब हम संघर्ष करते हैं, तभी हमें अपने बल व सामर्थ्य का पता चलता है । संघर्ष करने से ही आगे बढ़ने का हौसला, आत्मविश्वास  मिलता है और अंततः हम अपनी मंजिल को हासिल कर लेते हैं ।

जीवन एक संघर्ष

ऐसी Motivational बातें जिन्हें जानने के बाद शायद आपकी जीने की सोच ही बदल जाये

  1. एक सिक्का हमेशा आवाज करता है पेपर का नोट नहीं, ऐसे ही जब तुम्हारी कीमत बढे तो शांत रहना सीखो|
  2. वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ पर अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ|
  3. बचपन की वो बीमारी भी अच्छी लगती थी, जिसमे स्कुल से छुट्टी मिल जाती थी|
  4. जीना दुनिया की सबसे नायाब चीज है ज्यादातर लोग बस मौजूद रहते है|
  5. जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है|
  6. सफलता पाने के लिए विश्वास करना होगा कि हम कर सकते है|
  7. तूफान आना भी जरुरी होता है जिंदगी में तभी पता चलता है कौन हाथ पकड़ता है और कौन साथ छोड़ जाता है

कुछ गलतियां जो हम जीवन में अक्सर करते हैं

  1. उन चीजों को अनदेखा करना जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं।
  2. उन चीजों की अत्याधिक परवाह करना जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं है।
  3. एेसा मान लेना कि जिंदगी मे अब कुछ भी सीखने या करने के लिए बहुत देर हो चुकी है।
  4. एेसा मान लेना कि कुछ नहीं बदलेगा और आपको सब कुछ उसी रूप में स्वीकार करना पड़ेगा।
  5. किसी काम में मुश्किलों के अाते ही तुरंत समर्पण कर देना।
  6. हर वक्त हर चीज में परफेक्शन को ढूढ़ना।
  7. एेसा मान लेना कि मैं कुछ भी अच्छा नहीं कर सकता हूँ।
  8. एेसा मानना कि हमारे पास प्राकृतिक प्रतिभा नहीं है।
  9. अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होना।
  10. अपने माता-पिता की उपेक्षा करना।
  11. अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर होना।
  12. हमेशा इस बात की परवाह करना कि दूसरे क्या सोचेंगे।
  13. सफलता की किसी और की परिभाषा को मानना। याद रखिए हर इंसान के लिए सफलता की परिभाषा अलग होती है।

हिम्मत बढ़ा देनेवाले जीवनमंत्र

मुश्किल कुछ नहीं है दुनिया में, तू जरा हिम्मत तो कर|
ख्वाब बदलेंगे हकीकत में, तू जरा कोशिश तो कर|
आंधियां सदा चलती नहीं, मुश्किलें सदा रहेती नहीं|
मिलेगी तुजे मंजिल तेरी, तू जरा कोशिश तो कर||

जीवन में गिरना भी अच्छा है औकात का पता चलता है|
बढ़ाते है जब हाथ उठाने को, तो अपनो का पता चलता है||

अगर जीवन में कुछ पाना है तो अपने तरीके बदलो, इरादे नहीं|
राह संगर्ष की जो चलता है, वो ही संसार बदलता है|
जिसने रातो से जंग जीती है, सूर्य बनकर वही निखरता है||

लोग आपके बारे में क्या सोचते है|
अगर ये भी आप सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे||

नाकामियाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल देते है|
और कामियाब लोग अपने फैसले से पूरी दुनिया बदल देते है||

जिंदगी अपने दम पर मुक्कमल हो पाती है|
औरो के दम पर तो सिर्फ जनाजे उठा करते है ||

आदमी बड़ा हो या छोटा कोई फर्क नहीं पड़ता|
उसकी कहानी बढ़ी होनी चाहिए||

जिंदगी को जलवे से जीना है तो हमेशा याद रखो ये बात

एक गाँव में लगभग 700 से 1000 लोग रहा करते थे। समस्या ये थी के वहा के लोगों में एकता नहीं थी, हमेंशा लड़ाई झगड़ा, भाई-भाई का सगा नहीं था, ना ही कोई अपने माँ-बाप और बड़े-बुजर्गों का आदर किया करता था।एक दिन एक साधू वहाँ से गुज़र रहा था, तो उसने गाँव मे ही रात रुकने का फ़ैसला किया। उसने गाँव की हालत देखी तो उसे तरस आ गया, उसने ग्रामीणों को एक किताब दी(रामायण, गीता, कुरान, बाइबिल) और कहा की इस किताब में अच्छी बातें लिखी हुई है इसे पढ़ कर या जो पढ़ना नहीं जानता सुन कर अपने जीवन मे उतारो, और अपने जीवन को सफल बनाओ और वो चले गए।ग्रामीणों में से जो पढ़ना जनता था उसने किताब को पढ़ कर सभी को सुनाया, सब को किताब की बाते अच्छी लगी, सब ने किताब की अलग-अलग प्रतियां छपवा कर अपने-अपने पास रख ली।

चूंकि किताब सब को अच्छी लगी इसलिए लोगो ने इसे अच्छी तरह कपड़े से बांध कर संभाल कर रखा, अपने बच्चों को भी छूने नहीं दिया कि कही किताब खराब ना हो जाये, फिर धीरे-धीरे लोग उस अच्छी किताब की पूजा करने लगे, काम पर जाने से पहले किताब को प्रणाम कर के जाने लगे। और ऐसा करते करते पीढियां गुज़र गई। और ऐसा आज भी जारी है…
लेकिन गांव में फिर से लड़ाई झगड़े होने लगे थे, क्योंकि गाँव वालों ने किताब को तो अपना लिया था, लेकिन उसके अंदर की बातों को नहीं अपनाया था। “किताबें महत्वपूर्ण नहीं है दोस्तों, उसके अंदर लिखी हुई बातें महत्वपूर्ण है” पढ़ो नहीं समझों ||

सफल जीवन की परिभाषा