कभी कभी ..

कभी कभी ..

कभी कभी खुद के लिए भी जीने की इच्छा होती है, पर ज़िम्मेदारियाँ उतना भी वक़्त नहीं देती है.. !! Kabhi Kabhi Khud ke liye bhi jeene ki Ichha hoti…
जलाये जो चिराग..

जलाये जो चिराग..

जलाये जो चिराग, तो अँधेरे बुरा मान बैठे.. छोटी सी ज़िन्दगी है साहेब, किस-किस को मनाएंगे हम.. Jlaaye jo Chiraag, to Andhere bura maan baithe.. Chhoti si Zindagi hai Saheb,…
ज़रूरते भी..

ज़रूरते भी..

ज़रूरते भी ज़रूरी हैं, जीने के लिए .. लेकिन तुझसे ज़रूरी तो, ज़िन्दगी भी नहीं .. Zrurte bhi Zruri hain, Jeene ke liye.. Lekin tujhse zruri to, Zindagi bhi nahi..