सबूत हर इक बात का..

सबूत हर इक बात का, देना पड़ रहा है…
भरोसा वाक़ई, बुरे दौर से गुज़र रहा है.!!

Saboot har ik bat ka, dena pad rha hai..
Bharosa wakay, bure dau se Guzar rha hai..

ज़िन्दगी को कभी तो..

ज़िन्दगी को कभी तो, खुला छोड़ दो जीने के लिए..
क्योंकि बहुत संभाली चीज़, वक़्त पर नहीं मिलती..

Zindagi ko kabhi to, khula chhod do jeene ke liye..
kyonki bahut smbhali cheez, waqt par nahi milti..

कैसे कह दूँ ..

कैसे कह दूँ के थक गया हूँ मैं, ना जाने किस-किस का होंसला हूँ मैं..
Kaise keh du ke thak gya hu main, na jane kis-kis ka honsla hu main..

ज़िन्दगी में हर इंसान को..

ज़िन्दगी में हर इंसान को, मुक़म्मल चैन-ओ-आराम नहीं मिलता ||
मिल जाये जिस रोज़ आराम, ज़िन्दगी का तब नाम नहीं मिलता ||

Zindagi mein har Insan ko, muqammal chain-O-araam nahi milta.
Mil jaye jis roz araam, zindagi ka tab nam nahi milta.

आओ मिलकर आग लगा दें..

आओ मिलकर आग लगा दें इस महोब्बत को, ताकि फिर ना तबाह हो किसी मासूम की ज़िन्दगी..
Aao milkar aag lga dein is Mahobbat ko, taki fir na tabaah ho kisi masoom ki zindagi..

भरे बाजार से..

भरे बाजार से अक्सर खाली हाथ ही लोट आता हूँ,
पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रही..

bhare bazaar se aqsar khali hath hi laut ataa hu,
pahle paise nahi the ab khwahishein nahi rhi..

थोड़ा सा रफू..

थोड़ा सा रफू करके देखिये ना, फिर से नयी सी लगेगी ज़िन्दगी ही तो है..
thoda sa rafu kar ke dekhiye na, fir se Nayi si lagegi Zindagi hi to hai..

उम्र ज़ाया करदी..

उम्र ज़ाया करदी लोगो ने औरों के वजूद में नुक्स निकलते-निकलते,
इतना खुद को तराशा होता तो फ़रिश्ते बन जाते..

umar zaya kardi logo ne auro ke wajud mein nukas nikalte-nikalte,
itna khud ko trasha hota to Farishte ban jate…

चढ़ती थी उस मज़ार में..

चढ़ती थी उस मज़ार में चादरें बेशुमार,
और बाहर बैठा एक फ़क़ीर सर्दी में मर गया..

chadhti thi us mzaar mein chaadrein Beshumar,
aur bahar baitha ek faqir sardi mein mar gya..