ना पा सकूँ..

ना पा सकूँ, ना भुला सकूँ..
तू मेरी मज़बूरी सा है, तेरे बिना जी रहे हैं..
और जी भी लेंगे, फिर भी तू जरुरी सा है..

Naa Paa Saku, Naa Bhula saku..
Tu meri Majburi sa hai, Tere bina Jee rhe hain..
Aur Jee bhi lenge, Fir bhi tu Jaruri sa hai..

तलाश है एक ऐसे शख्स की..

तलाश है एक ऐसे शख्स की, जो आँखों में उस वक़्त दर्द देखले..
जब दुनिया हमसे कह रही हो, क्या यार तुम हमेशा हस्ते ही रहते हो..

Talash hai ek ese shaks ki, jo ankhon mein us waqt dard dekhle..
Jab Duniya hamse keh rhi ho, kya yar tum hmesha Haste hi rhte ho..

छोड़ देंगे तेरी दुनिया..

छोड़ देंगे तेरी दुनिया को एक रोज़ ए खुदा,
ज़ख़्म दे दे कर किराये की ज़िन्दगी का एहसास ना दिला..

Chhod denge teri duniya ko ek Roz E Khuda,
Zakham de de kar kiraye ki Zindagi ka Ehsas na dila..

अपने हालात का..

अपने हालात का खुद पता नहीं मुझको,
मैंने औरो से सुना है के मैं परेशान हूँ आजकल..

Apne halaat ka Khud Pta nahi mujhko,
Maine auro se Suna hai, ke main Pareshan hu ajkal..

घुटन क्या है..

घुटन क्या है यह पूछिए उस बच्चे से,
जो काम करता है रोटी के लिए खिलौनों की दुकान पर..

Ghutan kya hai yeh poochhiye us bache se,
Jo kaam krta hai Roti ke liye khilono ki Dukan par..

आज भी, आंसू से..

आज भी, आंसू से देती हूँ ब्याज तेरा..
तेरी मोहब्बत का कर्ज, बहुत भारी पड़ा..।।

Aaj bhi, Aansu se deti hu Byaaz tera..
Teri Mohabbat ka Karz, bahut Bhari pdaa..

निगाहों से भी..

निगाहों से भी चोट लगती है,
जब हमें कोई देखकर भी अनदेखा कर देते हैं..

Nigahon se bhi Chot lagti hai,
jab hmein koi Dekh kar bhi Andekha kar dete hain..

खाली पड़ा है..

खाली पड़ा है मेरे पड़ोस का मैदान,
एक मोबाइल बच्चों की गेंद चुरा ले गया..

Khali pda hai mere Pados ka maidan,
Ek Mobile bachchon ki Gaind chura le gya..

जब कोई इंसान..

जब कोई इंसान दर्द में होता है,
तब वो सबसे ज़्यादा रब्ब के करीब होता है..

Jab koi Insaan Dard mein hota hai,
tab wo sabse zyada Rabb ke kareeb hota hai..

वो मुझे भूल गया..

वो मुझे भूल गया तो क्या हुआ.. ???
लोग हाथों से दफ़न कर के भूल जाते हैं के कबर कौन सी है..

Wo mujhe bhool gya to kya hua.. ???
log hatho se Dafan kar ke bhool jate hain ke kabar kaun si hai..