कसूर तो बहुत किये..

कसूर तो बहुत किये हैं ज़िन्दगी में पर सज़ा वंहा मिली जहाँ बेकसूर थे..
Kasoor to bahut kiye hain Zindagi mein par sazaa wahaa mili janha Beksoor the…

हसरतें मिट गई सारी..

हसरतें मिट गई सारी पर दिल को चैन ना आया..
तलब थी जिससे मिलने की अफ़सोस उसे मेरा ख्याल भी नहीं आया..

Hasrtein mit gai sari par dil ko Chain na aya..
Talab thi jisse milne ki Afsos use mera khyal bhi nahi aya..

रो कर मांग लिया..

रो कर मांग लिया करो अपने रब्ब से,
वो अपने बन्दों की आँखों में आंसू देख नहीं सकता..

Ro kar Maang liya karo apne Rabb se,
Wo Apne Bando ki Ankhon mein Aansu dekh nahi skta..

कभी कभी ..

कभी कभी खुद के लिए भी जीने की इच्छा होती है,
पर ज़िम्मेदारियाँ उतना भी वक़्त नहीं देती है.. !!

Kabhi Kabhi Khud ke liye bhi jeene ki Ichha hoti hai,
Par Zimmedariyan utna bhi waqt nahi deti hai..

चाह कर भी..

चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते,
डर है कंही कह ना दे की यह हक़ तुम्हे किसने दिया..

Chaah kar bhi unka haal nahi poochh skte,
Darr hai kanhi keh na de ki yeh haq tumhe kisne diya..

दिल से…

दिल से परवाह करने वाले, जुबां से ज़ाहिर नहीं करते..
Dil se Parwaah karne wale, Zubaan se Zahir nhi karte..

हमें हद में..

हमें हद में रहना पसंद है और लोग इसे गुरूर समझते हैं…
Hmein Hadh mein rehna Pasand hai aur log ise Guroor smjhte hainn..

जलाये जो चिराग..

जलाये जो चिराग, तो अँधेरे बुरा मान बैठे..
छोटी सी ज़िन्दगी है साहेब, किस-किस को मनाएंगे हम..

Jlaaye jo Chiraag, to Andhere bura maan baithe..
Chhoti si Zindagi hai Saheb, kis-kis ko mnayenge hum..

तनहा सा…

तनहा सा हो गया है, मेरा कमरा आजकल.
एक पंखा बोला करता था, पर अब सर्दियाँ आ गई हैं..

Tanha sa ho gya hai, Mera kamra aajkal.
Ek Pankhaa bola karta tha, Par ab Sardiyan aa gai hain..

ज़रूरते भी..

ज़रूरते भी ज़रूरी हैं, जीने के लिए ..
लेकिन तुझसे ज़रूरी तो, ज़िन्दगी भी नहीं ..

Zrurte bhi Zruri hain, Jeene ke liye..
Lekin tujhse zruri to, Zindagi bhi nahi..