मुझको छाँव में रखा..

मुझको छाँव में रखा, खुद जलता रहा धूप में..
मैंने देखा है एक फरिश्ता बाप के रूप में..

mujhko Chhanv mein rkha, khud jalta rha Dhoop mein..
Maine dekha hai Ek Farishta Baap ke Roop mein..

घुटन क्या है..

घुटन क्या है यह पूछिए उस बच्चे से,
जो काम करता है रोटी के लिए खिलौनों की दुकान पर..

Ghutan kya hai yeh poochhiye us bache se,
Jo kaam krta hai Roti ke liye khilono ki Dukan par..

आज भी, आंसू से..

आज भी, आंसू से देती हूँ ब्याज तेरा..
तेरी मोहब्बत का कर्ज, बहुत भारी पड़ा..।।

Aaj bhi, Aansu se deti hu Byaaz tera..
Teri Mohabbat ka Karz, bahut Bhari pdaa..

निगाहों से भी..

निगाहों से भी चोट लगती है,
जब हमें कोई देखकर भी अनदेखा कर देते हैं..

Nigahon se bhi Chot lagti hai,
jab hmein koi Dekh kar bhi Andekha kar dete hain..

मैं रात भर..

मैं रात भर जन्नत की सैर करता रहा यारों,
सुबह आँख खुली तो सर ‘माँ’ के कदमो में था..

Main raat bhar Jannat ki Sair krta rha yaro,
Subah Aankh khuli to Sar ‘Maa’ ke Kadmo mein tha..

खाली पड़ा है..

खाली पड़ा है मेरे पड़ोस का मैदान,
एक मोबाइल बच्चों की गेंद चुरा ले गया..

Khali pda hai mere Pados ka maidan,
Ek Mobile bachchon ki Gaind chura le gya..

कचरे में फेंकी रोटियां

कचरे में फेंकी रोटियां रोज़ ये बयां करती हैं,
की पेट भरते ही इंसान अपनी औकात भूल जाता है..

kachre mein fainki rotiya roz yeh byan karti hain,
ki pait bharte hi Insaan apni Aukaat bhool jata hai..

रास्तों को कदम चाहिए..

रास्तों को कदम चाहिए, कदमों को होंसला चाहिए..
होंसले को ज़िन्दगी चाहिए और ज़िन्दगी को तेरा फैसला..

Rasto ko Kadam chahiye, Kadmo ko Honsla chahiye..
Honsle ko Zindagi chahiye aur Zindagi ko tera Faisla..

ज़मीर ज़िंदा रख..

ज़मीर ज़िंदा रख, कबीर ज़िंदा रख..
सुलतान भी बन जाये तो, दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख..

Zameer Zinda rakh, Kabeer Zinda rakh..
Sulatan bhi ban jaye to, Dil mein Faqeer Zinda rakh..

खाली पन्नो की तरह..

खाली पन्नो की तरह दिन पलटते जा रहे हैं..
खबर नहीं के यह “आ रहे” हैं या “जा रहे” हैं…

Khali Panno ki tarah din Palat te jaa rhe hain..
Khabar nahi ke yeh “aa rahe” hain ya “jaa rahe” hain…