तुझे चाहते हैं बेइंतहा..

तुझे चाहते हैं बेइंतहा, पर चाहना नहीं आता..
यह कैसी मोहब्बत है, के हमें कहना नहीं आता..
ज़िन्दगी में आ जाओ हमारी ज़िन्दगी बनकर,
के तेरे बिना हमें ज़िंदा रहना नहीं आता..

Tujhe chahte hain Beintaha, Par Chahna nahi ataa..
Yeh kaisi Mohabbat hai, ke hmein kehna nahi ataa..
Zindagi mein aa jao hmari Zindagi bankar,
Ke tere bina hmein Zinda rehna nahi ataa..

भूल जाने का कोई..

भूल जाने का कोई इरादा ना था, तेरे सिवा किसी से किया कोई वादा ना था.
निकाल देते दिल से शायद तुम्हारे ख्याल, पर इस कम्बखत दिल में कोई दरवाज़ा ना था.

bhool jane ka koi irada na tha, tere siwa kisi se kiya koi wadaa na tha.
nikal dete dil se shayad tunhare khyal, par is kambakhat dil mein koi darwaza na tha.

महोब्बतो का सलीका..

महोब्बतो का सलीका सीखा दिए मैंने, तेरे बगैर भी जी कर दिखा दिया मैंने..
बिछड़ना मिलना तो किस्मत की बात है, लेकिन दुआएँ देते हैं शायर बना दिया तूने..

Mohabbat ka saleeka sikha diya maine, tere bgair bhi jeekar dikha diya maine..
Bichhdna milna to qismat ki bat hai, lekin duayein dete hain Shayar bna dia tune..

जुदा तो एक दिन..

जुदा तो एक दिन सांसें भी हो जाती हैं, तो फिर शिकायत सिर्फ मोहोब्बत से क्यों..
juda to ek din sansein bhi ho jati hain, to fir shikayat sirf Mohobbat se kyon..

कुछ हदें हैं मेरी..

कुछ हदें हैं मेरी, कुछ हदें हैं तेरी..
लेकिन दायरों में भी इश्क़ होता है…||
kuchh hadein hain meri, kuchh hadein hain teri..
lekin dayro mein bhi ishq hota hai…

Darwazaa chhota hi rakhiye..

दरवाज़ा छोटा ही रखिए अपने मकान का,
जो झुक के आ गया समझो वही अपना है…
Darwazaa chhota hi rakhiye apne makaan ka,
Jo jhuk ke aa gya samjho wahi apna hai..

Izhar-e-Ishq…

इज़हार-ए-इश्क़ का मज़ा तो तब है, जब मैं खामोश रहु और तू बेचैन रहे…
Izhar-e-Ishq ka mzaa to tab hai, jab main khamosh rahu aur tu bechain rhe..