Pani dariya mein ho…

पानी दरिया में हो या आँखों में,
गहराई और राज़ दोनों में होते हैं ||
Pani dariya mein ho ya ankho mein,
Gehrayi aur Raaz dono mein hote hain.

Ek chahat thi tere sang..

mohabbat shayari image download

एक  चाहत  थी  तेरे  संग  जीने  की,
वरना मौहब्बत तो किसी से भी हो सकती थी।।
Ek chahat thi tere sang jeene ki,
Warna Mohabbat to kisi se bhi ho sakti thi.

Insaniyat ka koi Dharm nahi..

इंसानियत(Insaniyat) खुद में एक धर्म(Dharm) है, इसे हम धर्म(Dharm) अलग नहीं कर सकते बिना इंसानियत(Insaniyat) के धर्म (Dharm) ऐसे है जैसे बंजर भूमि जिसमे जितना भी बीज डालते जायो खेती कभी भी हरी-भरी लहलहा नहीं सकती |जो पूजा हम भगवान के चरणों में  करते हैं वो केवल द्रव्य पूजा है| पर  अगर  किसी जीते जागते इंसान की सेवा करते हैं वो भाव किसी पूजा से कम नहीं| भगवान् के चरणों में जल घंटे भर बाद भी चढ़ा दे तो को फर्क नहीं पड़ेगा पर यदि किसी प्यासे को पानी १ घंटे बाद पिलाओगे तो वो मर भी सकता है सो हमेशा ध्यान दे जिस कर्म  की आवश्यकता सबसे पहले करने  की है वही धर्म(Dharm) है और इंसानियत (Insaniyat)भी…..

Instaniyat

“एक किस्सा आपसे शेयर करती हु संक्षेप में बात तो बहुत छोटी सी है बस भाव बताना चाहती हु.. मैं एक दिन गुरद्वारा साहेब जा रही थी माथा टेकने हाथ में कुछ फ्रूट्स पकडे हुए थे जो मुझे बाबा जी के चरणों में रखने थे (क्योंकि उस मौसम के वो पहले फ्रूट्स थे जो भगवान को भोग लगाकर ही शुरू करने थे) और मेरी माता जी की इच्छा थी के ऐसा ही हो.. लो जी गुरद्वारा साहेब आ गया जो घर से कुछ दुरी पर ही था| अभी  मैंने पहली सीढ़ी पर कदम रखा ही था की सामने से एक गरीब छोटा सा बच्चा आते हुए देखा अपनी माँ के साथ मटमैले कपड़ो में जो शायद इस भरी गर्मी में गुरद्वारे से ठंडा पानी पीने आया था तभी अचानक मेरे मन में क्या आया की  मैंने उससे पूछा बच्चे फल खाओगे उसने अपनी माँ की तरफ देखा और मुस्कुरा कर सर हिलाया.. मैंने हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और वो पैकेट उसे पकड़ा दिया वो ख़ुशी ख़ुशी माँ के साथ अपने घर चला गया| उस पल एक अदभुद सी ख़ुशी हुई क्योंकि मुझे लगा मैंने वो चीज़ सही जगह पर दी जिसे असल में उसकी ज़रूरत थी शायद ..”

Instaniyat

 इंसानियत(Insaniyat)ही  पहला  धर्म(Dharm)  है  इंसान  का,
फिर  पन्ना  खुलता  है  गीता  या  कुरान  का.. ||

अब यदि आप गहरायी में जानना चाहते हैं के इंसानियत(Insaniyat) है क्या तो आइये इसके विषय में भी चर्चा कर लेते हैं..

इंसानियत(Insaniyat) यानी मानवता(Insaniyat), फिर चाहे वो किसी भी देश का हो, किसी भी जाति का हो या फिर किसी भी शहर का हो सबका एकमात्र प्रथम उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनने का होना चाहिए। हर किसी इंसान के रंग रूप, सूरत, शारीरिक बनावट, रहन-सहन, सोच-विचार और भाषा आदि में समानतायें भी होती हैं और असमानताएं भी होती हैं, लेकिन ईश्वर ने हम सभी को पाँच तत्वों से बनाया है। हम सभी में इस परमात्मा का अंश है। आज के इस दौर में इंसान मानवता(Insaniyat) को छोड़कर, इंसान के द्वारा बनाये गए धर्मों के भेद-भाव के रास्ते पर निकल पड़ा है। जिसके चलते एक इंसान किसी दूसरे इंसान की ना तो मज़बूरी समझता है और ना ही उसकी मदद ही करता है। यहाँ पर इंसानियत(Insaniyat) पर धर्म(Dharm) की चोट पड़ती है। लोग इंसानियत(Insaniyat) को छोड़कर अपने ही द्वारा रची गई धर्मों (Dharm)की बेड़ियों में जकड़े जा रहे हैं। इंसान धर्म(Dharm) की आड़ में अपने अंदर पल रहे वैर, निंदा, नफरत, अविश्वास, उन्माद और जातिवादी भेदभाव के कारण अभिमान को प्राथमिकता दे रहा है। जिससे उसके भीतर की मानवता(Insaniyat) धीरे धीरे दम तोड़ रही है। इंसान प्यार करना भूलता जा रहा है, अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और तो और अपने परमपिता परमात्मा को भी भूल गया है। इन सबके चलते मानव के मन में दानवता का वास होता जा रहा है।Motivation

भगवन इंसानियत (Insaniyat)में बस्ते हैं,
और   लोग   मज़हबो(Dharm) में   ढूंढ़ते   हैं ||

आज धर्म(Dharm) के नाम पर लोग लहू-लुहान करने से पीछे नहीं हटते जिससे संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। आज इंसान- इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है क्योंकि वो पराये धर्म(Dharm) से है। लोगों का मूल उद्देश्य अपना स्वार्थ सिद्ध करना हो गया है किसी को पैसे का स्वार्थ है तो कोई ओहदे को लेकर और तो कोई एक तरफ़ा प्यार के स्वार्थ में अँधा है। इसी के चलते मानव इंसानियत (Insaniyat)को अपने जीवन से चलता कर देते हैं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है- ”इंसान इंसान को डस रहा है और साँप बैठकर रो रहा है”

यही वो इंसान है जो अब सिर्फ ‘मैं’ शब्द में ही उलझकर रह गया है और इसी में जीना चाहता है। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर प्रतीत होता है कि ‘मरते हैं इंसान भी और अब मर रही है, इंसानियत'(Insaniyat)। कुछ घटनाओं को देखें तो लगेगा कि इंसानियत (Insaniyat)तार तार हो रही है। एक घटना अनुसार सड़क हादसे में  मौत से जूझते हुए एक इन्सान को भी लोगों ने यूँ ही सड़क पर छोड़ दिया मरने के लिए। किसी ने उसकी मदद करनी नहीं चाही। यह जरूर किया कि उस इंसान के दर्द से तड़पने की वीडियो बनाई और उसको सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया ताकि उस मरते हुए इंसान के साथ साथ मर रही इंसानियत(Insaniyat) का चेहरा भी देखा जा सके। लोग आज भी यही सोचते हैं कि अगर ऐसी घायल अवस्था में वो किसी को अस्पताल ले जाते हैं तो उनको कानूनी कार्यवाही के झंझट में पड़ना होगा। मैं समझती हूँ कि यहाँ लोगों में जानकारी का आभाव है, उनको यह नहीं पता कि ऐसे किसी भी घायल इंसान को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम नहीं बताने की छूट है। यहाँ तक कि सरकार ने आपातकालीन सुविधा भी उपलब्ध कराई है ताकि किसी को भी घायल व्यक्ति के इलाज़ का भार ना उठाना पड़े। एक ये भी वजह है जो लोग किसी दूसरी की मदद करने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं इन सब का असर उनकी जेब और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर ना पड़े।Motivation

 ज़रूरी  नहीं  जिसमे  सांस  नहीं  वही  मुर्दा  है,
जिसमे इंसानियत (Insaniyat) नहीं  वो  भी तो मुर्दा ही  है ||

निष्कर्ष में मैंने यही पाया है कि चाहे बात किसी जाति के विवाद की हो या बात किसी इंसान की मदद न करने की हो या फिर धर्म(Dharm) के नाम पर इंसान को इंसान के खिलाफ करने की हो, इन सभी में शिक्षा का अभाव है, समझ की कमी है और अपना खुद का स्वार्थ है क्योंकि अब इंसानों में “मै” शब्द का अभिमान बढ़ता जा रहा है। यह अभिमान जब तक हममें रहेगा तब तक उपरोक्त घटनाओं का जो विवरण दिया गया है वैसे किस्से सुनने को मिलते रहेंगे। इंसानियत(Insaniyat) कुछ रुपयों को लेकर, अपने लालच और अपने लोभ व लालसा को लेकर ऐसे हर बार शर्मसार होती रहेगी। हम लोगों को अपने संस्कारों को अपनी शिक्षा पर अमल करने की जरूरत है। मैं यह नहीं मानती की कोई भी धर्म(Dharm) या मज़हब इंसानियत (Insaniyat)को मारने के लिए कहता होगा तो क्यों ना हम यह शुरुआत अपने परिवार से करें अपने परिवार को समय देकर उनका हमारे जीवन में महत्त्व को समझें। अगर शुरुआत अपने घर से  होगी  तभी तो सामाजिक तौर पर इंसानियत(Insaniyat) को ला  पाएंगे।

मरते  थे   इंसान  कभी  पर, अब  मर  रही  है   इंसानियत,  Instaniyat
पैसे  सत्ता  और  ताकत  के  लालच में आ गई है, हैवानियत
धर्म और मज़हब का ढोल बजा के लहू लुहान किया इंसानों को,
जाति, धर्म  का  लालच  देके   झोंक  दिया   इंसानियत  को,
मार  दिया  उस  प्यार  को  और  उसके  प्यारे  एहसास  को,
जप  रहा   है   जाप   बस   “मैं”   शब्द     के     नाम   को,
दया  की  भावना  तो  चली गई, ना ही अपनों का अब दर्द रहा,
देख  ख़ुशी  दूसरों   की  आज  का  इंसान   क्यों  जल   रहा,
कैसा   युग   है,  और   क्या   समय   की   मार   है,   प्यारे
इंसान   इंसान  को  डस  रहा  और  साँप  बैठकर  रो   रहा।।

Read more Related topics:

andaaz-e-shayari.com/jeevan-ka-falsafa/

https://andaaz-e-shayari.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7/

lot aati hai har bar..

dard bhari shayari image download

लौट आती है हर बार मेरी इबादत खाली,
जाने किस  ऊंचाई  पर खुदा रहता है।|
lot aati hai har bar meri Ibadat khali,
na jane kis unchayi par khuda rehta hai.

क्रोध – “क्रोध एक तरह का पागलपन है”

क्रोध आखिर है क्या? आइये जाने इसके बारे में

मैंने बहुत बार इस बारे में सोचा के आखिर गुस्सा/क्रोध है क्या? और क्यों आज हर दूसरा तीसरा इंसान इससे परेशान है.. और सब जानते हुए भी के इसके क्या-क्या नुकसान है चाह कर भी इससे निजात नहीं पा पाता.. चलिए इस बारे में गहरायी से जानने की कोशिश करते हैं..

आज सभी चाहते हैं के हमारा घर स्वर्ग बन जाये खासकर औरते पायी पायी बचा कर घर का डेकोरेशन का सामान बनाती हैंकयोंकि घर को  स्वर्ग बनाना चाहती हैं लेकिन जब आपकों क्रोध आता है तो वो सब होकर भी आपका क्रोध उसे नरक बना देता है और नरक में कोई रहना नहीं चाहता| सारी मेहनत पर आपका क्रोध पानी फेर देता है आपने जो मेहनत करके स्वर्ग बनाया होता और नरक ऐसी जगह होती है जहा कोई भी रहना नहीं चाहता है इसलिए सरे सुख के साधन होते हुए भी फिर भी सुख हमको मिलता नहीं है क्योंकि क्रोध हमारे उस सुख का नाश कर देता है इसलिए ऐसी भयंकरऔर खतरनाक चीज़ जो हमें स्वर्ग से नरक में ले आये उसे निकल दें अपने जीवन से.. और हम में से भी कई लोगो ने यह महसूस किया होता है के जिस-जिस घर में क्रोध हो रहा है इस समय वहां बच्चे से लेकर बड़े तक बेज़ार हैं सिर्फ किसी एक व्यक्ति के क्रोध के कारण पूरा घर जल रहा होता है यदि हम अपने जीवन में अपनी इच्छाओं को शांत करले, जो हो गया वो  ठीक है और किसी ने कह दिया तो भी ठीक है|हम में से ही कुछ लोग ऐसे होंगे जो क्रोध की सज़ा भुगत रहे होंगे..ऐसे क्रोध को हम क्यों नहीं त्याग देते जो माँ बेटे को अलग कर  देता है पति और पत्नी को भाई-भाई को अलग करवा  देता  है| हम क्यों नहीं शुक्र करते हैं भगवान का की जो हुआ बहुत अच्छा हुआ.. कई औरते पति के लेट आने पर अक्सर झगड़ा करती हैं पर यह क्यों नहीं समझती के पति लेट आया तो  भी भगवान का  शुक्र करे की आया तो सही… तो फिर गुस्सा आएगा ही नहीं अगर आता ही नहीं  तो क्या करते??? उन्हें समझना चाहिए अगर वो पति ही न रहे तो किस परगुस्सा करेंगे|  आदमी लोग अपनी पत्नियों पर क्रोध करते हैं के यह क्या बनाया मायके वालो ने कुछ सिखाया नहीं.. अगर पत्नी  ने दाल चावल बनाये तो भी शुक्र करे के मिले तो सही ऐसे बी लोग हैं जिन्हे सूखी रोटी तक भी नसीब नहीं होती तो क्रोध आएगा ही नहीं | इसलिए अपने ऐसे शत्रु को घर से निकल फेंके जो आपके घर में अशांति ही अशांति फैला देता है क्यांकि  क्रोधवश आप तो डूबोगे ही पर आपके  साथ  पूरे  परिवार को डूबना पड़ता है कभी कभी पति- पत्नी का झगड़ा होता है  पत्नी अपने ऊपर केरोसीन डाल लेती है खुद तो मर जाती है  पर बच्चो को दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं|  कभी सोचा है के हमारे छोटे बचो का क्या कसूर होता है  के आपके क्रोध की सज़ा आपके बचो को भुगतनी पड़ती है| कई औरते  तो ऐसी  भी होती हैं को जो क्रोध में जलने को तो त्यार हो जाती हैं परन्तु जल कर फिर वापिस बच जाती हैं  हाथ खराब हो जाता है चेहरा खराब हो जाता है जमाने की हंसी का कारन बनकर रह जाती हैं.. कई लोग ऊपर से तो गिरने को गिर जाते हैं परन्तु बच जाते हैं पर टाँगे कटवा देते, हाथ कटवा देते हैं, जुबान रह जाती है और ज़माने में मज़्ज़ाक़ का कारन बनकर रह जाते हैं सिर्फ  कुछ देर के  क्रोध के कारण | इसलिए क्यों न हम अपने जीवन को सरल बनाएं कोम्प्रोमाईज़ की आदत डाले.. इसलिए जो भगवान करता है वो अच्छा करता है  याद रखो के हमारा ईश्वर कभी भी हमारे लिए बुरा नहीं करेगा उसके हर काम में हमारी भलाई होती है हम ही हैं जो समझ नहीं पाते लेकिन जब परिणाम आता है तो पता लगता है के भगवान तुम ही सही थे | इसी बात पर मुझे एक कहानी याद आ गयी..

“जैसे एक आदमी था उसे कही भी नौकरी नहीं मिलती थी वो दर-दर भटकता था उसे कोई भी नहीं रखता था उसे लगता मैं सबसे बड़ा अभागी हु उसे जो भी  मिलता वो उसे कहता के तुम्हारे भगवान ने देखो मेरे साथ आज तक कभी अच्छा नहीं किया  देखो मुझे बचपन से लेकर अब तक सर्फ दुःख ही दुःख दिए,उसने मेरे साथ हमेश बे इंसाफ़ी ही की है  वो हर वक़्त ऊपर वाले को कोसता ही रहता|ऐसे करते करते एक दिन उसे दुबई में जॉब लग गयी उसमे अहंकार आ गया के मेरे भाग खुल गए अब मैं दुबई जाऊंगा बहुत कमाऊंगा मुझे भगवान की क्या ज़रूरत.. ऐसे ही जॉब का दिन भी आ गया उसकी फ्लिघ्त थी अगले दिन दुबई की इसलिए वो सुबह जल्दी उठा टैक्सी ली और भगा एयरपोर्ट की और पर रस्ते में टैक्सी का एक्सीडेंट हो गया और उसकी फ्लाइट निकल गई  उसने फिर से भगवान को कोसना शुरू क्र दिया देखा तुम तो कभी मेरा अच्छा होते हुए देख ही ही सकते मुंह तक आया हुआ नेवाला छीन लिया और आपकी किस्मत को फिर से कोसने लगा..  घर वापिस आया  और मुंह उतर क्र बैठ गया तभी उसे पता चला के जिस फ्लाइट में वो जाने वाला था उस फ्लाइट का टेक ऑफ करते ही क्रैश हो गया  और सब के सब यात्री मरे गए.. तब उसने भगवान का शुक्र किया ||”

क्रोध का नुकसान

क्रोध करने को तो आप एक पल के लिए करते हैं पर बाद में सारा दिन आपका कलप कलप कर जाता है|  क्रोध के बाद हम पश्चाताप करते हैं के मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था यह गलत हो गया मुझसे या ज़्यादा कह दिया मैंने.. काश मैंने क्रोध न किया होता कई बार आप ऐसा काम कर जाते हैं क्रोधवश के जिसकी वजह से हमें सारी उम्र रोना पड़ता है क्योंकि क्रोध अँधा होता है, क्रोध बहरा होता है, क्रोध पागल होता है, वो नहीं देखता है के सामने माँ है पिता है या बच्चा है और उस क्रोध की सज़ा तो हमको मिलती ही है  पर हमारे पूरे परिवार  को भी भुगतनी पड़ती  है | याद रखिये चूल्हे की अग्नि तो पानी डालने से बुझ जाती है पर हमारे अंदर क्रोध की अग्नि सब जलाने के बाद ही बुझती है क्रोधी व्यक्ति हमेशा अंदर ही अंदर जलता ही रहता है यह अग्नि कभी बुझती नहीं |

“एक गाँव में एक साधु आये उनकी बहुत ख्याति थी के वह बहुत दिगंबर साधु महात्मा हैं, वो कहते थे के मैंने अपने आप को जीत लिया  है इसलिए वो अग्नि के सामने बैठ कर तपस्या करते थे और कहते थे के यह अग्नि मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती | उसी गाँव में एक और विवेकी संत आये उन्होंने सोचा के यह संत कहते हैं के यह अग्नि मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकती तो ज़रा देखु के इनके अंदर सच में अग्नि बची है के नहीं| इसलिए जब वो तपस्या करके बैठे तो अग्नि सारी बुझ गई थी तो विवेकी संत ने  कहा महाराज आप कृपा करके थोड़ी अग्नि मुझे देदें.. उस साधु ने कहा के अब तो अग्नि बुझ चुकी है आप कल आएं| तो विवेकी साधु चले गए और  फिर थोड़ी देर बाद वो वापिस आये और कहा महाराज अग्नि है ? उन्होंने फिरसे कहा अभी तो कहा अग्नि बुझ चुकी है और वो संत  वापिस चले गए.. इसी प्रकार वो विवेकी संत 5 से 10 मिंट बाद फिर वापिस आये और कहने लगे के महाराज अग्नि है..?? साधु क्रोध में आकर कहने लगे के तुम्हे एक बार में सुनाई नहीं देता.. पागल हो क्या.. अभी तो कुछ देर पहले बताया के अग्नि बुझ चुकी है.. तभी उस विवेकी संत ने मुस्कुरा कर कहा के महात्मा अभी अग्नि कहा बुझी है? अग्नि तो आपके अंदर जल रही है अभी क्रोध रुपी अग्नि, लकड़ियों की अग्नि बुझने से क्या होगा.. “

कुछ अन्य नुक्सान..

  1. गुस्सा करने वाला व्यक्ति दूसरे का नुकसान कर पाये या नहीं लेकिन खुद का नुकसान तो जरूर कर लेता है। इससे उस व्यक्ति कोहृदय रोग,डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, नींद नहीं आना, मानसिक तनाव, प्रतिरोधक क्षमता में कमी आदि बीमारियाँ होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  2. इसके अलावा इस स्वाभाव के कारण उस व्यक्ति काकैरियर पीछे रह जाता है , उसके रिश्ते टूट कर बिखर जाते है। वह व्यक्ति खुद अपनों के दिल पर ऐसे घाव बना देता है जो कभी भर नहीं पाते।
  3. गुस्सा करने वाले व्यक्ति केअपने परिवार वाले भी उस पर विश्वास नहीं कर पाते , कोई उनसे आराम से बात नहीं कर पाता , ईमानदारी से सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते , विशेषकर बच्चों के लिए तो यह अनुभव भयानक होता है जो जिंदगी भर उनका दिल दुखाता है।

क्रोध पर नियंत्रण कैसे पाएं

आप अपने क्रोध को कण्ट्रोल करे अपने लिए नहीं अपने परिवार के लिए  अपने बच्चो के लिए..इसके लिए  शुक्र करना और सबर करना सीख ले और जब सबर और शुक्र करना आप सीख जाएं तो इच्छा कम हो जाएगी| सो गुस्से को कण्ट्रोल करने का सीधा रास्ता है इच्छा पर नियंत्रण करना| जब आप को गुस्सा आता है तो कुछ देर के लिए तो आपको बहुत अच्छा लगता है कुछ देर के लिए तो आप खुद को राजा समझते हो के देखा मेरे आगे कोई नहीं बोलता मैंने सबको चुप करवा दिया.. पर याद रखना क्रोधी व्यक्ति के पीठ पीछे सब लोग उनका मज़्ज़ाक़ उड़ाते हैं मुंहे बुरा भला कहते हैं  क्रोध करते हैं क्योंकि क्रोधी इंसान को कोई पसंद नहीं करता | मुँह पर तो तारीफ करते हैं पर बुराई शुरू क्र देते हैं आपके जाते ही, अगर हम सब अपने क्रोध पर नियत्रण करे तो सारा घर बच जाएगा वरना सारा घर जल जाएगा आपके क्रोध से| कुछ और ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें..

  1. आप दूसरे लोगों कोया परिस्थितियों को नहीं बदल सकते जो आपको गुस्सा दिलाते हैं लेकिन ऐसे में खुद में बदलाव लाने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।
  2. आपको भी महसूस होने लगता है कि गुस्सा आने परआप पर एक ताकतवर और अप्रत्याशित चीज हावी हो जाती है जो आपको नुकसान पहुंचाती है , अतः इसे कतई हावी ना होने दें।
  3. गुस्सा करने से पहले एक बार सोचें – क्या इस बात या स्थितिके लिए गुस्सा करना ठीक है ? क्या गुस्सा करके बचा हुआ दिन बर्बाद करना सही होगा ? क्या कोई दूसरा उपाय हो सकता है ? क्या यह कीमती समय का सदुपयोग है ?

क्रोध रोके रुका ही नहीं

क्रोध रोके रुका ही नहीं   
मुठ्ठियों में बँधा ही नहीं

कैसे मंज़िल पे पहुँचेगा वो
आजतक जो चला ही नहीं

बाँटते-बाँटते कर्ण की
गाँठ में कुछ बचा ही नहीं

कितने सालों से घर में कोई
खिलखिलाकर हँसा ही नहीं

एड्स या कैंसर की तरह
शक की कोई दवा ही नहीं

जो लिपट न सकी पेड़ से
सच कहूँ वो लता ही नहीं

ऋण सभी पर रहा साँस का
मरते दम तक चुका ही नहीं

 

 

Quotes – “Define yourself”

  • The only disability in life is a bad attitude.
  • Accept no one’s definition of your life, define yourself.
  • Everyone you will ever meet knows something you don’t.
  • Don’t stop when you are tired, STOP when you are DONE.
  • The most powerful weapon on earth is the human soul on fire.
  • Our lives are defined by opportunities, even the ones we miss.

  • Trust takes years to build, seconds to break and forever to repair.
  • The best thing about the future is it comes one day at a time.
  • If you are afraid of failure you don’t deserve to be successful!
  • The moment you give up is the moment you let someone else win.
  • It is not joy that makes us grateful. It is gratitude that makes us joyful.
  • Surround yourself only with people who are going to lift you higher.
  • Strength and growth come only through continuous effort and struggle.

  • We tend to judge others by their behavior, and ourselves by our intentions.
  • Forgiveness says you are given another chance to make a new beginning.
  • Failure doesn’t mean you are a failure… it just means you haven’t succeeded yet.
  • When you make a commitment, you build hope. When you keep it, you build trust.
  • If you desire to make a difference in the world, you must be different from the world.
  • Great achievement is usually born of great sacrifice, and is never the result of selfishness.

  • A word of encouragement after failure is worth more than an hour of praise after success.
  • If you want something you’ve never had then you’ve got to do something you’ve never done.
  • We can save many relations,If we understand a simple fact that people are not wrong, they are different.
  • Strength does not come from winning. Your struggles develop your strengths. When you go through hardships and decide not to surrender, that is strength.
  • We always Work for a Better Tomorrow.. But When Tomorrow Comes Instead of Enjoying it,We Again Think of a Better Tomorrow.. Let’s Have a Better Today!!!

Positive Thoughts-“the key to Happiness”

Positive thoughts can let you focus on the brighter side of life. A positive person can enjoy happiness and success since he believes that he can easily overcome all the obstacles and difficulties that come his way. Not all people generally agree with positive thinking. In fact, some people consider it as nonsense. However, there are a number of people who believe in its effectiveness. If you want to use this in your life then you must practice the attitude of positive thinking in everything that you do.

How To Think Positive Thoughts

Sometimes even the most effective medicine is not sufficient for a complete recovery. If you are dealing with sickness or major life transformation then here are some ways that can help you to channel your negative thoughts into positive outlooks.

  • When talking, try to use positive words only: If you keep on telling yourself “I can’t” then you might persuade yourself that this is the truth. Try to tell yourself “I will do my best” instead.
  • Push your negative feelings away and stay focused on the positive things in life: When you’re feeling down, don’t get overwhelmed by those negative thoughts.
  • Fill your thoughts with words that invoke strength and success: Focus on words that can make you happy and strong instead of those that can make you feel incompetent.
  • Create a positive affirmation on your mind: One of the best positive thoughts is to tell yourself “I deserve to be happy.” Believing that this is a reality can give you a positive outlook on life.
  • When you start feeling anxious, direct yourself to happy thoughts: Create a positive image in your mind to boost positivity and avoid bad feelings.
  • Always believe that you can succeed: Give yourself the benefit of the doubt by believing that you will succeed in accomplishing your goals.

Instead of getting stuck in negativity, turn to these fewest positive thoughts and quotes for the day to get you going.

Positive thoughts are the key to happiness. Start your morning with one small positive to motivate you throughout the day. Positive thoughts and prayers are very helpful during the difficult times of our lives. Always think positive!

Beautiful Positive Thoughts of the Day

Thinking positively does not mean that you have not committed any mistakes. Think carefully about the things that you did wrong so that you can avoid them in the future.

1. Somewhere, someone else is happy with less than you have.

Even if you’ve messed up, there are also some things that you’ve accomplished.

2. A positive attitude may not solve all your problems, but it annoys enough people to make it worth.

Beating yourself will not change anything. Instead, try to forgive yourself so that you can move on.

3. Never complain, never explain. Resist the temptation to defend yourself or make excuses.

Learn from the past by looking forward to the future with positive thoughts.

4. One small positive thought in the morning can change the entire outcome of your day.

Regardless of how bad things are, always be grateful for all the good ones that happened in your life.

5. Today, wherever you go, carry the intention of peace, love, and harmony in your heart.

Enumerate the reasons why you want to achieve your goal.

6. Your smile will give you a positive countenance that will make people feel comfortable around you.

Substitute your negative thoughts with positive ones so you can enjoy positive outcomes.

7. Positive mind, positive vibes, positive life.

Look on the positive side of life but be realistic and accept the fact that life can also be complicated sometimes. Always develop a positive vision.

8. Night is designed to end the worries and fears of the day.

Positive thinking can let you do anything better than negative thinking does.

  1. Failures are part of life; If you don’t fail, you don’t learn. If you don’t learn you’ll never change.

Positive thoughts can transform darkness into light. Turn your dreams into reality by using creative visualization.

10. How to be positive – Say “I can,” instead of “I can’t!” Smile more. Be optimistic.

Positive thoughts can let you enjoy better health and secure relationships.

  1. Your best teacher is your last mistake.

Your happiness will entirely depend on the quality of your thoughts. Even when you are confronting challenges, it is also important to have a little humor in your life.

  1. To climb steep hills requires a slow pace at first.

Take one slow step at a time until the hill is climbed. Positive thinking can enhance your overall well-being.

  1. Thank you for helping me build my life.

It’s tempting to dwell on your mistakes but the only thing that you can do right now is to learn from it and move forward.

  1. It’s exhausting to fight a war inside your head every single day.

Embracing the right attitude can convert your negative thoughts into positive ones.Encouragement is much better than correction.

  1. Instead of thinking about what you’re missing, try thinking about what you have…

Always believe that your life is worth living for. You can never have a positive life if your mind is always negative.

  1. Don’t quit. When things go wrong, as they sometimes will.

Once a negative idea enters your mind, you have to substitute it with a constructive one instantly.

  1. Change your thoughts and you change your world.

Having a positive attitude can bring happiness into your life.

Jeevan-“the less u Expect, more u Happy”

“ज़िन्दगी कभी आसन नही होती इसे आसान करना पड़ता है,कुछ नजर अंदाज करके कुछ बर्दास्त करके..”

जीवन का अर्थ क्या है

जीवन का अर्थ क्या है? मैं जीवन में उद्देश्य, पूर्णता तथा सन्तुष्टि कैसे खोज सकता हूँ? क्या मैं किसी बात के चिरस्थायी महत्व की प्राप्ति कर सकता हूँ? बहुत सारे लोगों ने इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के ऊपर सोचना कभी नहीं छोड़ा है। वे सालों पीछे मुड़कर देखते हैं और आश्चर्य करते हैं कि उनके सम्बन्ध क्यों नहीं टूटे और वे इतना ज्यादा खालीपन का अहसास क्यों करते हैं, हालाँकि उन्होंने वह सब कुछ पा लिया जिसको पाने के लिए वे निकले थे। एक खिलाड़ी जो बेसबाल के खेल में बहुत अधिक ख्याति के शिखर पर पहुँच चुका था, से पूछा गया कि जब उसने शुरू में बेसबाल खेलना आरम्भ किया था तो उसकी क्या इच्छा थी कि कोई उसे क्या सलाह देता। उसने उत्तर दिया, “मेरी इच्छा थी कि कोई मुझे बताता कि जब आप शिखर पर पहुँच जाते हैं, तो वहाँ पर कुछ नहीं होता।” कई उद्देश्य अपने खालीपन को तब प्रकट करते हैं जब केवल उनका पीछा करने में कई वर्ष व्यर्थ हो गए होते हैं ।हमारी मानवतावादी संस्कृति में, लोग कई उद्देश्यों का पीछा, यह सोचकर करते हैं कि इनमें वे उस अर्थ को पा लेंगे। इनमें से कुछ कार्यों में: व्यापारिक सफलता, धन-सम्पत्ति, अच्छे सम्बन्ध, यौन-सम्बन्ध, मनोरंजन, दूसरों के प्रति भलाई, वगैरह सम्मिलित है। लोगों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि जब उन्होंने धन-सम्पत्ति, सम्बन्धों और आनन्द के लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया, तब भी उनके अन्दर एक गहरी शून्यता थी, खालीपन का एक ऐसा अहसास जिसे कोई वस्तु भरती हुई प्रतीत नहीं होती।

बाइबल की सभोपदेशक नामक पुस्तक के लेखक ने इस बात का एहसास किया जब उसने कहा, “व्यर्थ ही व्यर्थ! व्यर्थ ही व्यर्थ ! …सब कुछ व्यर्थ है” | राजा सुलेमान के पास, जो सभोपदेशक का लेखक है, परिमाप से परे अथाह धन-सम्पत्ति थी, अपने या हमारे समय के किसी भी व्यक्ति से ज्यादा ज्ञान था, सैकड़ों स्त्रियाँ थीं, कई महल और बगीचे थे जो कि कई राज्यों की ईर्ष्या के कारण थे, सर्वोत्तम भोजन और मदिरा थी, और हर प्रकार का मनोरंजन उपलब्ध था। फिर भी उसने एक समय यह कहा कि जो कुछ उसका हृदय चाहता था, उसने उसका पीछा किया। और उस पर भी उसने यह सार निकाला कि, “सूरज के नीचे” – ऐसा यापन किया हुआ जीवन जैसे कि जीवन में केवल यही कुछ हो जिसे हम आँखों से देख सकते हैं और इन्द्रियों से महसूस कर सकते हैं – व्यर्थ है! ऐसी शून्यता क्यों है। क्योंकि परमेश्वर ने हमारी रचना आज-और-अभी का अनुभव करने के अतिरिक्त किसी और वस्तु के लिए भी की थी। सुलेमान ने परमेश्वर के विषय में कहा, “उसने मनुष्यों के मनों में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान रखा” अपने हृदयों में हम इसबात को जानते हैं कि केवल “आज-और-अभी” ही सब कुछ नहीं है।

जीवन का  उद्देश्य

साधारण शब्दों में  इस संसार में अनेक प्रकार के लोग हैं जो अपनी जिंदगी अपने सोच के आधार पर जी रहे हैं ! हर कोई जिंदगी के दौड़ में सामिल है ! एक दुसरे को पछाड़ना ही जिंदगी का मक़सद बन गया है ! आज किसी के पास वक़्त नहीं है ! अपनों के लिए भी नहीं ! सब जिंदगी जी रहे हैं , लेकिन कहीं सुकून नहीं  कहीं शान्ति नहीं ! परमात्मा के बारे में जानने का बात तो दूर , आज कल तो परमात्मा भी शक के दायरे में है ! परमात्मा एक से कई बन गए हैं ! अब तो इस बात पर लड़ाई होती है कौनसा परमात्मा श्रेष्ठ है?

शांत और सुकूनभरा जीवन

आदमी कितना जीता है? 70 या 80 साल। बहुत अच्छी सेहत हुई तो 100 साल। इन 100 वर्षों में वह प्रारंभिक 25 वर्ष तो संसार, खुद को समझने और करियर बनाने में ही लगा देता होगा। अगले 25 वर्ष वह गृहस्थ जीवन के संघर्ष में गंवा देता होगा और अंत में सोचता होगा कि अब जिया जाए…  किन्तु अब जीने के लिए बचा क्या….. ? शांत और सुकूनभरा जिंदगी के लिए हमें क्या करना चाहिए ? नीचे दिए गए पंक्तियाँ में एक पागल के मुँह से सुना था !

  •          इस तरह न कमाओ कि पाप हो जाये
  •          इस तरह न खर्च करो कि क़र्ज़ हो जाये
  •          इस तरह न खाओ कि मर्ज़ हो जाये
  •          इस तरह न बोलो कि क्लेश हो जाये
  •          इस तरह न चलो के देर हो जाये
  •          इस तरह न सोचो कि चिंता हो जाये

लेकिन आजकल  मनुष्य इसका  बिपरीत करता है ! कभी कभी में सोचती हूँ  पागल कौन है ?

मनुस्य कि जिंदगी एक अहम् वरदान है ! यह एक अमूल्य अवसर है परमात्मा के बारे में जानने का! यह अवसर को गवाना सब से भारी नुक्सान है !इंसान को नमक कि तरह होना चाहिए, जो खाने में रहता है तो दिखाई नहीं देता और अगर न हो तो उसकी कमी महसूस होता ! मनुष्य के जिंदगी का अर्थ तब पूरा होगा जब वह किसी और के काम आये !

मनुष्य के जिंदगीं का उद्देस्य परमात्मा को जानना है ! इस मक़सद के लिए इंसान को कोशिश करनी चाहिए ! हमें सब से पेहेले एक अच्छा इंसान बनना चाहिए ! इसमें अनेक बाधाएं आएंगी ! लेकिन लगातार कोशिश ही सफलता लाती है ! धीरे धीरे बहती हुई एक धारा पत्थर में छेद कर देती है !  निरंतर प्रयास होना चाहिए ! किसी मक़सद के लिए खड़े हो तो पेड़ कि तरह खड़े रहो ! और गिरना है तो गिरो बीज कि तरह ताकि दोबारा उग सको उस मक़सद को पूरा करने के लिए ! गिरने से हार नहीं होती , हार तब होती है जब और कोशिश नहीं होती !

जीवन के अर्थ के विषय में जीवनशास्त्रियो में सदैव ही मतभेद रहे हैं अन्य जीवनशास्त्रियो के अनुसार.. जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है , संघर्ष ही जीवन है । । इस सृष्टि में छोटे-से-छोटे प्राणी से लेकर बड़े-से-बड़े प्राणी तक, सभी किसी-न-किसी रूप में संघर्षरत हैं । जिसने संघर्ष (Struggle) करना छोड़ दिया, वह मृतप्राय हो गया । जीवन में संघर्ष है प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ । तरह-तरह के संघर्षों का सामना आएदिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है । जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, जीवन भी उनका साथ नहीं देता । जब हम संघर्ष करते हैं, तभी हमें अपने बल व सामर्थ्य का पता चलता है । संघर्ष करने से ही आगे बढ़ने का हौसला, आत्मविश्वास  मिलता है और अंततः हम अपनी मंजिल को हासिल कर लेते हैं ।

जीवन एक संघर्ष

ऐसी Motivational बातें जिन्हें जानने के बाद शायद आपकी जीने की सोच ही बदल जाये

  1. एक सिक्का हमेशा आवाज करता है पेपर का नोट नहीं, ऐसे ही जब तुम्हारी कीमत बढे तो शांत रहना सीखो|
  2. वक्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ पर अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ|
  3. बचपन की वो बीमारी भी अच्छी लगती थी, जिसमे स्कुल से छुट्टी मिल जाती थी|
  4. जीना दुनिया की सबसे नायाब चीज है ज्यादातर लोग बस मौजूद रहते है|
  5. जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है|
  6. सफलता पाने के लिए विश्वास करना होगा कि हम कर सकते है|
  7. तूफान आना भी जरुरी होता है जिंदगी में तभी पता चलता है कौन हाथ पकड़ता है और कौन साथ छोड़ जाता है

कुछ गलतियां जो हम जीवन में अक्सर करते हैं

  1. उन चीजों को अनदेखा करना जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं।
  2. उन चीजों की अत्याधिक परवाह करना जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं है।
  3. एेसा मान लेना कि जिंदगी मे अब कुछ भी सीखने या करने के लिए बहुत देर हो चुकी है।
  4. एेसा मान लेना कि कुछ नहीं बदलेगा और आपको सब कुछ उसी रूप में स्वीकार करना पड़ेगा।
  5. किसी काम में मुश्किलों के अाते ही तुरंत समर्पण कर देना।
  6. हर वक्त हर चीज में परफेक्शन को ढूढ़ना।
  7. एेसा मान लेना कि मैं कुछ भी अच्छा नहीं कर सकता हूँ।
  8. एेसा मानना कि हमारे पास प्राकृतिक प्रतिभा नहीं है।
  9. अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होना।
  10. अपने माता-पिता की उपेक्षा करना।
  11. अपनी छोटी-छोटी खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर होना।
  12. हमेशा इस बात की परवाह करना कि दूसरे क्या सोचेंगे।
  13. सफलता की किसी और की परिभाषा को मानना। याद रखिए हर इंसान के लिए सफलता की परिभाषा अलग होती है।

हिम्मत बढ़ा देनेवाले जीवनमंत्र

मुश्किल कुछ नहीं है दुनिया में, तू जरा हिम्मत तो कर|
ख्वाब बदलेंगे हकीकत में, तू जरा कोशिश तो कर|
आंधियां सदा चलती नहीं, मुश्किलें सदा रहेती नहीं|
मिलेगी तुजे मंजिल तेरी, तू जरा कोशिश तो कर||

जीवन में गिरना भी अच्छा है औकात का पता चलता है|
बढ़ाते है जब हाथ उठाने को, तो अपनो का पता चलता है||

अगर जीवन में कुछ पाना है तो अपने तरीके बदलो, इरादे नहीं|
राह संगर्ष की जो चलता है, वो ही संसार बदलता है|
जिसने रातो से जंग जीती है, सूर्य बनकर वही निखरता है||

लोग आपके बारे में क्या सोचते है|
अगर ये भी आप सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे||

नाकामियाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल देते है|
और कामियाब लोग अपने फैसले से पूरी दुनिया बदल देते है||

जिंदगी अपने दम पर मुक्कमल हो पाती है|
औरो के दम पर तो सिर्फ जनाजे उठा करते है ||

आदमी बड़ा हो या छोटा कोई फर्क नहीं पड़ता|
उसकी कहानी बढ़ी होनी चाहिए||

जिंदगी को जलवे से जीना है तो हमेशा याद रखो ये बात

एक गाँव में लगभग 700 से 1000 लोग रहा करते थे। समस्या ये थी के वहा के लोगों में एकता नहीं थी, हमेंशा लड़ाई झगड़ा, भाई-भाई का सगा नहीं था, ना ही कोई अपने माँ-बाप और बड़े-बुजर्गों का आदर किया करता था।एक दिन एक साधू वहाँ से गुज़र रहा था, तो उसने गाँव मे ही रात रुकने का फ़ैसला किया। उसने गाँव की हालत देखी तो उसे तरस आ गया, उसने ग्रामीणों को एक किताब दी(रामायण, गीता, कुरान, बाइबिल) और कहा की इस किताब में अच्छी बातें लिखी हुई है इसे पढ़ कर या जो पढ़ना नहीं जानता सुन कर अपने जीवन मे उतारो, और अपने जीवन को सफल बनाओ और वो चले गए।ग्रामीणों में से जो पढ़ना जनता था उसने किताब को पढ़ कर सभी को सुनाया, सब को किताब की बाते अच्छी लगी, सब ने किताब की अलग-अलग प्रतियां छपवा कर अपने-अपने पास रख ली।

चूंकि किताब सब को अच्छी लगी इसलिए लोगो ने इसे अच्छी तरह कपड़े से बांध कर संभाल कर रखा, अपने बच्चों को भी छूने नहीं दिया कि कही किताब खराब ना हो जाये, फिर धीरे-धीरे लोग उस अच्छी किताब की पूजा करने लगे, काम पर जाने से पहले किताब को प्रणाम कर के जाने लगे। और ऐसा करते करते पीढियां गुज़र गई। और ऐसा आज भी जारी है…
लेकिन गांव में फिर से लड़ाई झगड़े होने लगे थे, क्योंकि गाँव वालों ने किताब को तो अपना लिया था, लेकिन उसके अंदर की बातों को नहीं अपनाया था। “किताबें महत्वपूर्ण नहीं है दोस्तों, उसके अंदर लिखी हुई बातें महत्वपूर्ण है” पढ़ो नहीं समझों ||

सफल जीवन की परिभाषा

 

Sufism – “spiritual path towards God”

(ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिये, इश्क़ और इबादत में नियत साफ़ रखिये..!!!)

सूफी किसे कहते हैं?

”सूफ़ी” शब्द ”सुफ” से बनता है और अरबी भाषा में इसका मतलब ”सुफ्फा” है, यानी ”दिल की सफाई।” कुछ लोग इसे फ़ारसी शब्द ”सूफ” से जोड़ कर ‘पश्मीना पोश” या ”कम्बल जैसा मोटा गरम कपड़ा पहनने वाले’ से लेते हैं तो कुछ इसे ‘सफ़’ से जोड़कर बताया कि क़यामत के दिन पहली सफ़ (पंक्ति) में जो नेक जन्नती लोग होंगे, ”सूफ़ी हैं।”दाता गंज बख्श अली हजवेरी लाहौरी रज़ियल्लाहू अन्हू ने अरबी के ‘सुफ्फा’ और हिंदुस्तानी शब्द ”सफाई” से जोड़ उसका   बयान यूँ किया है| सूफ़ी वो है जो अपने नश्वर अस्तित्व को परम सत्य की खोज में डूबा दे और दुनियावी ख्वाहिशों से मुक्त होकर आध्यात्मिकता और सत्यता से अपना रिश्ता जोड़ ले| सादगी, उच्च नैतिकता, न्यायप्रियता और दूसरों की इज़्ज़त करना सूफ़ी चरित्र की बुनियाद हैनियावी व शारीरिक इच्छाओं से बचना, आत्मा और अपनी ज़रूरतों पर क़ाबू रखना सूफ़ी की आदत में होता है। और सूफ़ी अपने को तपा कर मैं और तुम की बंदिशों से पाक हो जाता है।”

दाता गंज बख्श अली हजवेरी रज़ियल्लाहू अन्हू फ़रमाते हैं,’हया के फूल, सब्र व शुक्र के फल, अज़ व नियाज़ की जड़, ग़म की कोंपल, सच्चाई के दरख्त के पत्ते, अदब की छाल, हुस्ने एख़लाक़ के बीज, ये सब लेकर रियाज़त के हावन दस्ते में कूटते रहो और इसमें इश्क़े पशमानी का अर्क़ रोज़ मिलाते रहो इन सब दवाओं को दिल की डेकची में भरकर शौक के चूल्हे पर  पकाओ जब पक कर तैयार हो जाए तो सफ़ाए  क़ल्ब की साफी में छान लेना और मीठी ज़बान की शक्कर मिलाकर    मोहब्बत की तेज़ आंच देना, जिस वक्त तैयार हो कर उतरे तो उसे ख़ौफे ख़ुदा के हवाले से ठंडा कर इस्तेमाल करना।” ये ही वो महान नुस्खा है जो इंसान को इश्के ख़ुदा की भट्टी में तपा कर आज भी कुंदन कर सकता है सूफियों की इबादत, नेक  अमल और उच्च नैतिक मूल्यों का व्यावहारिक जीवन होता है। ये लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और सहाबा के नक्शे कदम पर अमल करते हुए, कुरानी की  शिक्षाओं को अपना कर इबादत को अपने जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं सूफियों का हर अमल सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा की   खातिर होता है। दुनिया के ज़ायके और हवस की खातिर नहीं।

हज़रत शेख शहाबुद्दीन सोहरावर्दी ने यूँ फ़रमाया कि सूफ़ीवाद के इल्म (ज्ञान) का औसत पालन, इश्क की इंतेहा और अताए इलाही है इस परिभाषा के अनुसार सूफ़ीवाद के तीन पहलू हुए:- इल्मी (ज्ञान), अमली (व्यावहारिक) और इश्क़े हक़ीक़ी   वास्तविक प्रेम) और गूढ़ रूप से यहाँ ये समझे कि ”आलिम का सूफ़ी होना ज़रूरी नहीं बल्कि सूफ़ी का आलिम होना ज़रूरी है इसके बारे में कुरान की ये हिदायत कि ”ख़ुदा से डरो जैसा डरना चाहिए ताकि इंसान गुनाहों से पाक रहे।” मगर किताबे इलाही ही फ़रमाती है,”औलिया अल्लाह को ना कोई ख़ौफ न ख्रतरा, उनकी हिफ़ाज़त ख़ुद ख़ुदा करता है।’ ये बात है सूफ़ी संतों के नेक अमल की।

आपके रास्ते को प्रकाश देने के लिए सात सूफी शिक्षण

  1. Surrender to Love(प्यार करने के लिए समर्पण)

“I for myself you for yourself, we love each other but we have no expectations of each other.”

  1.  Chant the Divine Name(दिव्य नाम का जप करें)

Hearts become tranquil through the remembrance of Allah.

  1. Work with Your Dreams(अपने सपनों के साथ काम करें)

“The ancient Sufis turned to their dreams for guidance, clarity and wisdom.”

  1.  Enter into Devotion and Service(भक्ति और सेवा में प्रवेश करें)

“The Sufi is a lover of God, and like any other lover, he proves  his love by constant remembrance of his Beloved. This constant attention to god has two effects: one outward and the other inward.”

  1.  Revel in Rumi(रुमी में खुलासा)

“Your is not to seek for love, but merely to seek and find all the barriers within yourself that you have built against it – Rumi.”

  1.  Dying Before You Die(मरने से पहले मरना)

“To a Sufi, each moment could be the last. So it’s important to be present in all of life and to live as if you could die in this moment, with your heart pure, your actions good and your relationships at peace.”

  1.  Honor the Divine Feminine(दिव्य स्त्री का सम्मान करें)

“Woman is the radiance of God, She is not your beloved. She is the beloved. She is the Creator you could say that she is not created”

सूफ़िआना कलाम

आ सजना इन नैनन में पलक ढाक तोहे लूँ , ना मैं देखूं यार को ना तोहे देखन दूँ ||

काजर धारु किरकरा जो सुरमा दिया न जाए, इन नैनन में पिय बसे दूजा कौन समाए, दूजा कौन समाए ||

छाप तिलक सब छीन,मोह से नैना मिलायके .. छाप तिलक सब छीनी,मोह से नैना मिलायके ||

 

प्रेमवटी का मधवा पिलायके, मतवारी कर दीन्ही मोह से नैना मिलायके ||

गोरी गोरी बैयाँ हरी हरी चूडियाँ , बैयाँ पकड़ हर लीनी मोह से नैना मिलायके ||

बल बल जाऊं तोरे रंगरजवा , अपनी सी रंग दीन्ही मोह से नैना मिलायके ||

खुसरो निजाम के बल बल जई है , मोहे सुहागन कीन्ही मोह से नैना मिलायके ||

———————————– *************** ————————————–

मुर्शिद से इश्क लड़ा कर तो देखो, सजदे में सर को झुका कर तो देखो II

बन जायेगा तुम्हारा गम-गुसार ये मुर्शिद, खुदी इनके आगे मिटा कर तो देखो II

कायल न हो जाओ तो कहना मुझसे, ज़रा दामन को अपने फैलाकर तो देखो II

हजूम राज़े-हक का उमड़ रहा है सीने में, ज़रा नजदीक मुर्शिद आ कर तो देखो II

तुमको फरेब की दुनिया से क्या होगा हासिल, ज़रा मोहब्बत में इनको आजमा कर तो देखो II

जब उल्फत का मसीहा है साथ अपने, ‘अमन’ इन पर अकीदा लाकर तो देखो II

भटकी हुई रूह को भी करार मिलेगा, बज़्म-ए-मुर्शिद की आ कर तो देखो II

———————————- *************** ————————————–

खुदा जाने कहाँ से जलवाये जाना कहाँ तक है, वहीँ तक देख सकता है नज़र जिसकी जहाँ तक है ||

हम इतनी भी न समझे अक़्ल खोई दिल गवां बैठे, के हुस्नो इश्क़ की दुनिया कहाँ से है कहाँ तक है ||

ज़मीन से आसमान तक एक सन्नाटे का आलम है, नहीं मालुम मेरे दिल की वीरानी कहाँ तक है ||

 

ज़मीन से आसमान तक आसमान से ला माकन तक है, खुदा जाने हमारे इश्क़ की दुनिया कहाँ तक है ||

नियाज़ो नाज़ की रूदाद हुस्नो इश्क़ का क़िस्सा, ये जो कुछ भी है सब उनकी हमारी दास्ताँ तक है ||

ख़याले यार ने तो आते ही गम कर दिया मुझको, यही है इब्तेदे तो इन्तहा इसकी कहाँ तक है ||

सुना है सूफियों से हमने अक्सर ख़ानक़ाहों में,  की यह रंगीन बयानी बेदम रंगीन बयां तक है ||

———————————— *************** ————————————–

मक्‍के गया गल मुक्दि नाहि, पवें सौ सौ जुम्मे पड़ आयें |

गंगा गया गल मुक्दि नाहि, पवें सौ सौ गोते ख़ईया |

गया गया गल मुक्दि नाहि, पवें सौ सौ पॅंड पड़ आइए |

बुल्ले शाह गल तां या मुक्दि, जदू मैं नू दिलों गवाये ||

 

पढ़ पढ़ आलम फ़ाज़ल होया, कदी अपने आप नू पढ़या नई |

जां जां वर्दां मंदिर मासिता, कदी मन अपने विच वरया ही नहि |

ए वे रोज़ शैतान नाल लड़या , कदी नॅफ्ज़ अपने नाल लड़या ही नहि |

बुल्ले शाह असमानी उड़ दिया फर्दा, जेडा घर बैठा वोनू फड़या ही नई||

 

सिर ते टोपी ते नियत खोटी, लेना की टोपी सिर धड़के |

तसबी फिरी पर दिल ना फिरया, लेना की तसबी हथ फड़के |

चिल्ले कित्ते पर रब ना मिलया, लेना की छिल्या विच वर्के |

बुल्या जाग बिन दूध नई जमदा, पावे लाल होये कदकद के ||

 

राती जागे ते शैख़ सदावें , पर रात नू जागन कुत्ते तैं थे उत्ते |

राती भौके बस ना कर्दे फिर, जेया लरण विच सुत्ते तैं थे उत्ते |

यार ता बुहा मूल ना छड्डया, पावें मरो सौ सौ जुत्ते तैं थे उत्ते |

बुल्ले शाह उठ यार माना लाए नई ते बाज़ी लाई गये कुत्ते तैं थे उत्ते ||

 

ना मैं पूजा पाठ जो कीति , ते ना मैं गंगा नाहया |

ना मैं पंज नामज़ा पद्रया , ते ना मैं तासबा खडकाया |

ना मैं तीहो रोज़ें रखे, ते ना मैं चिल्ला गुमाया |

बुल्ले शाह नू मुर्शद मिल्यया, उने ऐ वे जान बखस्या ||

हज़रत बाबा बुल्ले शाह

Shiv Kumar Batalvi – “Birha Da Sultan”

Shiv Kumar Batalvi

ਹਾਦਸਾ(Hadsa)

ਗੀਤ ਦਾ ਤੁਰਦਾ ਕਾਫ਼ਲਾ, ਮੁੜ ਹੋ ਗਿਆ ਬੇਆਸਰਾ |

ਮੱਥੇ ‘ਤੇ ਹੋਣੀ ਲਿਖ ਗਈ, ਇਕ ਖ਼ੂਬਸੂਰਤ ਹਾਦਸਾ (hadsa)।

ਇਕ ਨਾਗ ਚਿੱਟੇ ਦਿਵਸ ਦਾ, ਇਕ ਨਾਗ ਕਾਲੀ ਰਾਤ ਦਾ |

ਇਕ ਵਰਕ ਨੀਲਾ ਕਰ ਗਏ, ਕਿਸੇ ਗੀਤ ਦੇ ਇਤਿਹਾਸ ਦਾ ।|

ਸ਼ਬਦਾਂ ਦੇ ਕਾਲੇ ਥਲਾਂ ਵਿਚ, ਮੇਰਾ ਗੀਤ ਸੀ ਜਦ ਮਰ ਰਿਹਾ |

ਉਹ ਗੀਤ ਤੇਰੀ ਪੈੜ ਨੂੰ, ਮੁੜ ਮੁੜ ਪਿਆ ਸੀ ਝਾਕਦਾ ।

ਜ਼ਖ਼ਮੀ ਹੈ ਪਿੰਡਾ ਸੋਚ ਦਾ, ਜ਼ਖ਼ਮੀ ਹੈ ਪਿੰਡਾ ਆਸ ਦਾ ||

ਅੱਜ ਫੇਰ ਮੇਰੇ ਗੀਤ ਲਈ, ਕਫ਼ਨ ਨਾ ਮੈਥੋਂ ਪਾਟਦਾ ।

ਅੱਜਫੇਰ ਹਰ ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਦੇ, ਨੈਣਾਂ ‘ਚ ਹੰਝੂ ਆ ਗਿਆ |

ਧਰਤੀ ਤੇ ਕਰਜ਼ਾ ਚੜ੍ਹ ਗਿਆ, ਮੇਰੇ ਗੀਤ ਦੀ ਇਕ ਲਾਸ਼ ਦਾ ।|

ਕਾਗ਼ਜ਼ ਦੀ ਨੰਗੀ ਕਬਰ ਤੇ, ਇਹ ਗੀਤ ਜੋ ਅੱਜ ਸੌਂ ਗਿਆ |

ਇਹ ਗੀਤ ਸਾਰੇ ਜੱਗ ਨੂੰ, ਪਾਵੇ ਵਫ਼ਾ ਦਾ ਵਾਸਤਾ ।|

Shiv kumar Btalvi    

(Shiv Kumar Batalvi)

Shiv Kumar Batalvi

ਸ਼ਿਕਰਾ(Shikra)

ਮਾਏ ! ਨੀ ਮਾਏ ! ਮੈਂ ਇਕ, ਸ਼ਿਕਰਾ (shikra) ਯਾਰ ਬਣਾਇਆ |
ਉਹਦੇ ਸਿਰ ‘ਤੇ ਕਲਗੀ, ਤੇ ਉਹਦੇ ਪੈਰੀਂ ਝਾਂਜਰ |
ਤੇ ਉਹ ਚੋਗ ਚੁਗੀਂਦਾ ਆਇਆ, ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

ਇਕ ਉਹਦੇ ਰੂਪ ਦੀ ਧੁੱਪ ਤਿਖੇਰੀ, ਦੂਜਾ ਮਹਿਕਾਂ ਦਾ ਤਿਰਹਾਇਆ |
ਤੀਜਾ ਉਹਦਾ ਰੰਗ ਗੁਲਾਬੀ, ਕਿਸੇ ਗੋਰੀ ਮਾਂ ਦਾ ਜਾਇਆ ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

ਨੀ ਉਹ ਕੋਇਲਾਂ ਦਾ ਹਮਸਾਇਆ, ਚਿੱਟੇ ਦੰਦ ਜਿਉਂ ਧਾਨੋਂ ਬਗ਼ਲਾ |
ਤੌੜੀ ਮਾਰ ਉਡਾਇਆ ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ, ਇਸ਼ਕੇ (Ishqe) ਦਾ ਇਕ ਪਲੰਘ ਨੁਆਰੀ|
ਅਸਾਂ ਚਾਨਣੀਆਂ ਵਿਚ ਡਾਹਿਆ, ਤਨ ਦੀ ਚਾਦਰ ਹੋ ਗਈ ਮੈਲੀ |
ਉਸ ਪੈਰ ਜਾਂ ਪਲੰਘੇ ਪਾਇਆ, ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

ਦੁਖਣ ਮੇਰੇ ਨੈਣਾਂ ਦੇ ਕੋਏ, ਵਿਚ ਹੜ੍ਹ ਹੰਝੂਆਂ(Hanjuya) ਦਾ ਆਇਆ |
ਸਾਰੀ ਰਾਤ ਗਈ ਵਿਚ ਸੋਚਾਂ, ਉਸ ਇਹ ਕੀ ਜ਼ੁਲਮ ਕਮਾਇਆ |
ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

ਸੁਬ੍ਹਾ-ਸਵੇਰੇ ਲੈ ਨੀ ਵਟਣਾ, ਅਸਾਂ ਮਲ ਮਲ ਓਸ ਨੁਹਾਇਆ |
ਦੇਹੀ ਵਿਚੋਂ ਨਿਕਲਣ ਚਿਣਗਾਂ, ਤੇ ਸਾਡਾ ਹੱਥ ਗਿਆ ਕੁਮਲਾਇਆ |
ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

ਚੂਰੀ ਕੁੱਟਾਂ ਤੇ ਉਹ ਖਾਂਦਾ ਨਾਹੀਂ, ਉਹਨੂੰ ਦਿਲ ਦਾ ਮਾਸ ਖਵਾਇਆ |
ਇਕ ਉਡਾਰੀ ਐਸੀ ਮਾਰੀ, ਉਹ ਮੁੜ ਵਤਨੀਂ ਨਹੀਂ ਆਇਆ|
ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।ਮਾਏ ! ਨੀ ਮਾਏ !|

ਮੈਂ ਇਕ ਸ਼ਿਕਰਾ (shikra) ਯਾਰ ਬਣਾਇਆ, ਉਹਦੇ ਸਿਰ ‘ਤੇ ਕਲਗੀ |
ਤੇ ਉਹਦੇ ਪੈਰੀਂ ਝਾਂਜਰ, ਤੇ ਉਹ ਚੋਗ ਚੁਗੀਂਦਾ ਆਇਆ |
ਨੀ ਮੈਂ ਵਾਰੀ ਜਾਂ ।|

Shiv kumar Btalvi


Shiv Kumar Batalvi

ਮਾਂ(Maa)

ਮੈਂ ਸੁਣਿਆ ਜ਼ਮਾਨੇ ‘ਚ ਫਰਿਸ਼ਤੇ(farishte) ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਨੇਂ,
ਨਾਲ ਸਾਹ ਲੈਣ ਵਾਲੇ ਰਿਸ਼ਤੇ(rishte) ਵੀ ਹੁੰਦੇ ਨੇਂ।
ਮਾਂ (Maa) ਨੂੰ ਮੈਂ ਦੇਖਿਆ ਪਰ ਕੋਈ ਫਰਿਸ਼ਤਾ(farishta) ਨਹੀਂ ਵੇਖਿਆ,
ਮਾਂ (Maa) ਨਾਲੋਂ ਵਧਕੇ ਕੋਈ ਰਿਸ਼ਤਾ(rishta) ਨਹੀਂ ਵੇਖਿਆ।
ਜਿਸਦਿਆਂ ਸਾਹਾਂ(Sanhaa) ‘ਚ ਮੈਂ ਸਾਹ ਲੈਣਾ ਸਿੱਖਿਆ,
ਰੱਬ ਕਹਿਣ ਨਾਲੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਂ ਮਾਂ (Maa) ਕਹਿਣਾ ਸਿੱਖਿਆ ।|

maa


Shiv Kumar Batalvi

ਅੜ੍ਹਿਆ(Arhiya)

ਤੂੰ ਦਿਲ(Dil) ਦਾ ਮਹਿਰਮ ਐਂ ਤੂੰ ਹੀ ਏ ਸਾਹ ਸੱਜਣਾ(Sajjna), 
ਮੇਰੀ ਮੰਜਿਲ ਵੀ ਤੂੰ ਹੀ , ਤੂੰ ਹੀ ਏ ਰਾਹ ਸੱਜਣਾ (Sajjna),
ਗੱਲ ਕਰ ਨਾ ਦੂਰੀ ਦੀ ਜਾਵਾਂਗੀ ਮਰ ਅੜ੍ਹਿਆ (Arhiya)
ਜਿਵੇਂ ਲੋਕੀ ਕਰਦੇ ਨੇ, ਤੂੰ ਤਾਂ ਨਾ ਕਰ ਅੜ੍ਹਿਆ (Arhiya)||
ਤੇਰਾ ਨਾਂਅ ਲਿਖਿਆ ਏ ਰਗ ਰਗ ਤੇ ਤੇਰੇ ਵਾਜੋਂ
ਕੀ ਕਰਨਾ ਜੀ ਕੇ ਕੱਲੀ ਜੱਗ ਤੇ..
ਨੈਣਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾ ਅੱਖਾਂ ਲੈ ਚਿਹਰਾ ਪੜ ਅੜ੍ਹਿਆ (Arhiya)
ਜਿਵੇਂ ਲੋਕੀ ਕਰਦੇ ਨੇ, ਤੂੰ ਤਾਂ ਨਾ ਕਰ ਅੜ੍ਹਿਆ(Arhiya) ||

Shiv Kumar btalvi

(Shiv Kumar Batalvi)

” ਮੁਸਲਿਮ ਨੂੰ ਕੁਰਾਨ ਵਿੱਚ ਇਮਾਨ ਨਾ ਮਿਲੇਆ,
  ਹਿੰਦੂ ਨੂੰ ਗੀਤਾ ਵਿੱਚ ਭਗਵਾਨ ਨਾ ਮਿਲੇਆ,
  ਉਸ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਅਸਮਾਨ ਵਿੱਚ ਕੀ ਰੱਬ ਮਿਲੇਗਾ,
  ਜਿਸ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਇਨਸਾਨ ਵਿੱਚ ਇਨਸਾਨ ਨਾ ਮਿਲੇਆ.. ” 
“Muslim nu Kuran vich imaan na milya,
Hindu nu Geeta vich bhagwan na milya,
Us Insan nu Asmaan vich ki Rabb Milega,
Jis Insan nu Insan vich Insan na milya.. ”

” ਰਾਹ ਜਾਂਦੇ ਅੱਜ ਕਿਤੇ ਉਹ ਮਿਲ ਜਾਵੇ, 
 ਇਕ ਵਾਰੀ ਤੇ ਰੱਜ ਕੇ ਉਹਨੂੰ ਵੇਖ ਲਵਾਂ ,
 ਮੇਰੇ ਲਈ ਤਾਂ ਯਾਰ ਹੀ ਮੇਰੇ ਰੱਬ ਵਰਗਾ, 
 ਜਿਥੇ ਮਿਲ ਜਾਵੇ, ਉਥੇ ਮੱਥਾ ਟੇਕ ਲਵਾ.. ”   

“Raah jande aajj kite oh mil jawe,
Ik vari te rajj ke ohnu wekh lnwa,
Mere lai ta yaar hi mera Rabb warga,
Jithe mil jawe othe matha tek lnwa..”

 “ਸੱਚੇ ਪਿਆਰ ਤਾਂ ਹੁੰਦੇ ਦਿਲਾਂ ਦੇ ਮੇਲ ਲੋਕੋ ,
  ਧੱਕੇ ਨਾਲ ਪਿਆਰ ਨਾ ਪਾਏ ਜਾਦੇ , 
  ਕੋਈ ਲਾ ਕੇ ਜ਼ੋਰ ਵੇਖ ਲਵੇ ਜਿੰਨਾ ਮਰਜ਼ੀ ,
  ਸ਼ੱਜਣ ਔਵੇਂ ਨੀ ਮਨਾ ਚ ਵਸਾਏ ਜਾਦੇ ”
“Sache Pyar ta hunde dila de mel loko,
Dhakke nal  Pyar na paye jande,
Koi laa ke zor wekh lawe jinna marzi,
Sajjan ainwe nahi manaa ch vsaye jande..”

Shiv Kumar Btalvi

ਸ਼ਿਵ ਕੁਮਾਰ ਬਟਾਲਵੀ(Shiv Kumar Batalvi)


” We Love you Sir, you will always remain in our heart “