Rishto ki geeli zmeen

रिश्तो  की  गीली  ज़मीन  पर
लोग  अक्सर  फिसल  ही  जाते  हैं.. ||
Rishto ki geeli zmeen par
log aqsar fisal hi jate hain.

Khyalo ne to zinda rkha…

ख्यालो ने तो ज़िंदा रखा है
वरना सवालों ने तो कबका मार दिया होता ||
Khyalo ne to zinda rkha hai
Warna swalo ne to kbka mar dia hota.

Kisko kya mila

किसको  क्या  मिला  इसका  कोई  हिसाब  नहीं,
तेरे पास  रूह  नहीं  मेरे  पास  लिबास  नहीं ||
Kisko kya mila iska koi hisaab nahi,
Tere pass rooh nahi mere pass libaas nahi.

Jhankne ki kuch behtreen…

झाँकने   की  कुछ  बेहतरीन  जगहों  में  से,
एक  जगह अपना  गिरेबान  भी  है ||
Jhankne ki kuch behtreen jagaho mein se,
ek jagah apna Gireban bhi hai.

Pani dariya mein ho…

पानी दरिया में हो या आँखों में,
गहराई और राज़ दोनों में होते हैं ||
Pani dariya mein ho ya ankho mein,
Gehrayi aur Raaz dono mein hote hain.

Ek chahat thi tere sang..

mohabbat shayari image download

एक  चाहत  थी  तेरे  संग  जीने  की,
वरना मौहब्बत तो किसी से भी हो सकती थी।।
Ek chahat thi tere sang jeene ki,
Warna Mohabbat to kisi se bhi ho sakti thi.

Insaniyat ka koi Dharm nahi..

इंसानियत(Insaniyat) खुद में एक धर्म(Dharm) है, इसे हम धर्म(Dharm) अलग नहीं कर सकते बिना इंसानियत(Insaniyat) के धर्म (Dharm) ऐसे है जैसे बंजर भूमि जिसमे जितना भी बीज डालते जायो खेती कभी भी हरी-भरी लहलहा नहीं सकती |जो पूजा हम भगवान के चरणों में  करते हैं वो केवल द्रव्य पूजा है| पर  अगर  किसी जीते जागते इंसान की सेवा करते हैं वो भाव किसी पूजा से कम नहीं| भगवान् के चरणों में जल घंटे भर बाद भी चढ़ा दे तो को फर्क नहीं पड़ेगा पर यदि किसी प्यासे को पानी १ घंटे बाद पिलाओगे तो वो मर भी सकता है सो हमेशा ध्यान दे जिस कर्म  की आवश्यकता सबसे पहले करने  की है वही धर्म(Dharm) है और इंसानियत (Insaniyat)भी…..

Instaniyat

“एक किस्सा आपसे शेयर करती हु संक्षेप में बात तो बहुत छोटी सी है बस भाव बताना चाहती हु.. मैं एक दिन गुरद्वारा साहेब जा रही थी माथा टेकने हाथ में कुछ फ्रूट्स पकडे हुए थे जो मुझे बाबा जी के चरणों में रखने थे (क्योंकि उस मौसम के वो पहले फ्रूट्स थे जो भगवान को भोग लगाकर ही शुरू करने थे) और मेरी माता जी की इच्छा थी के ऐसा ही हो.. लो जी गुरद्वारा साहेब आ गया जो घर से कुछ दुरी पर ही था| अभी  मैंने पहली सीढ़ी पर कदम रखा ही था की सामने से एक गरीब छोटा सा बच्चा आते हुए देखा अपनी माँ के साथ मटमैले कपड़ो में जो शायद इस भरी गर्मी में गुरद्वारे से ठंडा पानी पीने आया था तभी अचानक मेरे मन में क्या आया की  मैंने उससे पूछा बच्चे फल खाओगे उसने अपनी माँ की तरफ देखा और मुस्कुरा कर सर हिलाया.. मैंने हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और वो पैकेट उसे पकड़ा दिया वो ख़ुशी ख़ुशी माँ के साथ अपने घर चला गया| उस पल एक अदभुद सी ख़ुशी हुई क्योंकि मुझे लगा मैंने वो चीज़ सही जगह पर दी जिसे असल में उसकी ज़रूरत थी शायद ..”

Instaniyat

 इंसानियत(Insaniyat)ही  पहला  धर्म(Dharm)  है  इंसान  का,
फिर  पन्ना  खुलता  है  गीता  या  कुरान  का.. ||

अब यदि आप गहरायी में जानना चाहते हैं के इंसानियत(Insaniyat) है क्या तो आइये इसके विषय में भी चर्चा कर लेते हैं..

इंसानियत(Insaniyat) यानी मानवता(Insaniyat), फिर चाहे वो किसी भी देश का हो, किसी भी जाति का हो या फिर किसी भी शहर का हो सबका एकमात्र प्रथम उद्देश्य एक अच्छा इंसान बनने का होना चाहिए। हर किसी इंसान के रंग रूप, सूरत, शारीरिक बनावट, रहन-सहन, सोच-विचार और भाषा आदि में समानतायें भी होती हैं और असमानताएं भी होती हैं, लेकिन ईश्वर ने हम सभी को पाँच तत्वों से बनाया है। हम सभी में इस परमात्मा का अंश है। आज के इस दौर में इंसान मानवता(Insaniyat) को छोड़कर, इंसान के द्वारा बनाये गए धर्मों के भेद-भाव के रास्ते पर निकल पड़ा है। जिसके चलते एक इंसान किसी दूसरे इंसान की ना तो मज़बूरी समझता है और ना ही उसकी मदद ही करता है। यहाँ पर इंसानियत(Insaniyat) पर धर्म(Dharm) की चोट पड़ती है। लोग इंसानियत(Insaniyat) को छोड़कर अपने ही द्वारा रची गई धर्मों (Dharm)की बेड़ियों में जकड़े जा रहे हैं। इंसान धर्म(Dharm) की आड़ में अपने अंदर पल रहे वैर, निंदा, नफरत, अविश्वास, उन्माद और जातिवादी भेदभाव के कारण अभिमान को प्राथमिकता दे रहा है। जिससे उसके भीतर की मानवता(Insaniyat) धीरे धीरे दम तोड़ रही है। इंसान प्यार करना भूलता जा रहा है, अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और तो और अपने परमपिता परमात्मा को भी भूल गया है। इन सबके चलते मानव के मन में दानवता का वास होता जा रहा है।Motivation

भगवन इंसानियत (Insaniyat)में बस्ते हैं,
और   लोग   मज़हबो(Dharm) में   ढूंढ़ते   हैं ||

आज धर्म(Dharm) के नाम पर लोग लहू-लुहान करने से पीछे नहीं हटते जिससे संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। आज इंसान- इंसान का दुश्मन बनता जा रहा है क्योंकि वो पराये धर्म(Dharm) से है। लोगों का मूल उद्देश्य अपना स्वार्थ सिद्ध करना हो गया है किसी को पैसे का स्वार्थ है तो कोई ओहदे को लेकर और तो कोई एक तरफ़ा प्यार के स्वार्थ में अँधा है। इसी के चलते मानव इंसानियत (Insaniyat)को अपने जीवन से चलता कर देते हैं। किसी शायर ने क्या खूब कहा है- ”इंसान इंसान को डस रहा है और साँप बैठकर रो रहा है”

यही वो इंसान है जो अब सिर्फ ‘मैं’ शब्द में ही उलझकर रह गया है और इसी में जीना चाहता है। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें देखकर प्रतीत होता है कि ‘मरते हैं इंसान भी और अब मर रही है, इंसानियत'(Insaniyat)। कुछ घटनाओं को देखें तो लगेगा कि इंसानियत (Insaniyat)तार तार हो रही है। एक घटना अनुसार सड़क हादसे में  मौत से जूझते हुए एक इन्सान को भी लोगों ने यूँ ही सड़क पर छोड़ दिया मरने के लिए। किसी ने उसकी मदद करनी नहीं चाही। यह जरूर किया कि उस इंसान के दर्द से तड़पने की वीडियो बनाई और उसको सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया ताकि उस मरते हुए इंसान के साथ साथ मर रही इंसानियत(Insaniyat) का चेहरा भी देखा जा सके। लोग आज भी यही सोचते हैं कि अगर ऐसी घायल अवस्था में वो किसी को अस्पताल ले जाते हैं तो उनको कानूनी कार्यवाही के झंझट में पड़ना होगा। मैं समझती हूँ कि यहाँ लोगों में जानकारी का आभाव है, उनको यह नहीं पता कि ऐसे किसी भी घायल इंसान को अस्पताल पहुँचाने वाले को अपना नाम नहीं बताने की छूट है। यहाँ तक कि सरकार ने आपातकालीन सुविधा भी उपलब्ध कराई है ताकि किसी को भी घायल व्यक्ति के इलाज़ का भार ना उठाना पड़े। एक ये भी वजह है जो लोग किसी दूसरी की मदद करने से पहले कई बार सोचते हैं कि कहीं इन सब का असर उनकी जेब और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर ना पड़े।Motivation

 ज़रूरी  नहीं  जिसमे  सांस  नहीं  वही  मुर्दा  है,
जिसमे इंसानियत (Insaniyat) नहीं  वो  भी तो मुर्दा ही  है ||

निष्कर्ष में मैंने यही पाया है कि चाहे बात किसी जाति के विवाद की हो या बात किसी इंसान की मदद न करने की हो या फिर धर्म(Dharm) के नाम पर इंसान को इंसान के खिलाफ करने की हो, इन सभी में शिक्षा का अभाव है, समझ की कमी है और अपना खुद का स्वार्थ है क्योंकि अब इंसानों में “मै” शब्द का अभिमान बढ़ता जा रहा है। यह अभिमान जब तक हममें रहेगा तब तक उपरोक्त घटनाओं का जो विवरण दिया गया है वैसे किस्से सुनने को मिलते रहेंगे। इंसानियत(Insaniyat) कुछ रुपयों को लेकर, अपने लालच और अपने लोभ व लालसा को लेकर ऐसे हर बार शर्मसार होती रहेगी। हम लोगों को अपने संस्कारों को अपनी शिक्षा पर अमल करने की जरूरत है। मैं यह नहीं मानती की कोई भी धर्म(Dharm) या मज़हब इंसानियत (Insaniyat)को मारने के लिए कहता होगा तो क्यों ना हम यह शुरुआत अपने परिवार से करें अपने परिवार को समय देकर उनका हमारे जीवन में महत्त्व को समझें। अगर शुरुआत अपने घर से  होगी  तभी तो सामाजिक तौर पर इंसानियत(Insaniyat) को ला  पाएंगे।

मरते  थे   इंसान  कभी  पर, अब  मर  रही  है   इंसानियत,  Instaniyat
पैसे  सत्ता  और  ताकत  के  लालच में आ गई है, हैवानियत
धर्म और मज़हब का ढोल बजा के लहू लुहान किया इंसानों को,
जाति, धर्म  का  लालच  देके   झोंक  दिया   इंसानियत  को,
मार  दिया  उस  प्यार  को  और  उसके  प्यारे  एहसास  को,
जप  रहा   है   जाप   बस   “मैं”   शब्द     के     नाम   को,
दया  की  भावना  तो  चली गई, ना ही अपनों का अब दर्द रहा,
देख  ख़ुशी  दूसरों   की  आज  का  इंसान   क्यों  जल   रहा,
कैसा   युग   है,  और   क्या   समय   की   मार   है,   प्यारे
इंसान   इंसान  को  डस  रहा  और  साँप  बैठकर  रो   रहा।।

Read more Related topics:

andaaz-e-shayari.com/jeevan-ka-falsafa/

https://andaaz-e-shayari.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a7/

lot aati hai har bar..

dard bhari shayari image download

लौट आती है हर बार मेरी इबादत खाली,
जाने किस  ऊंचाई  पर खुदा रहता है।|
lot aati hai har bar meri Ibadat khali,
na jane kis unchayi par khuda rehta hai.

क्रोध – “क्रोध एक तरह का पागलपन है”

क्रोध आखिर है क्या? आइये जाने इसके बारे में

मैंने बहुत बार इस बारे में सोचा के आखिर गुस्सा/क्रोध है क्या? और क्यों आज हर दूसरा तीसरा इंसान इससे परेशान है.. और सब जानते हुए भी के इसके क्या-क्या नुकसान है चाह कर भी इससे निजात नहीं पा पाता.. चलिए इस बारे में गहरायी से जानने की कोशिश करते हैं..

आज सभी चाहते हैं के हमारा घर स्वर्ग बन जाये खासकर औरते पायी पायी बचा कर घर का डेकोरेशन का सामान बनाती हैंकयोंकि घर को  स्वर्ग बनाना चाहती हैं लेकिन जब आपकों क्रोध आता है तो वो सब होकर भी आपका क्रोध उसे नरक बना देता है और नरक में कोई रहना नहीं चाहता| सारी मेहनत पर आपका क्रोध पानी फेर देता है आपने जो मेहनत करके स्वर्ग बनाया होता और नरक ऐसी जगह होती है जहा कोई भी रहना नहीं चाहता है इसलिए सरे सुख के साधन होते हुए भी फिर भी सुख हमको मिलता नहीं है क्योंकि क्रोध हमारे उस सुख का नाश कर देता है इसलिए ऐसी भयंकरऔर खतरनाक चीज़ जो हमें स्वर्ग से नरक में ले आये उसे निकल दें अपने जीवन से.. और हम में से भी कई लोगो ने यह महसूस किया होता है के जिस-जिस घर में क्रोध हो रहा है इस समय वहां बच्चे से लेकर बड़े तक बेज़ार हैं सिर्फ किसी एक व्यक्ति के क्रोध के कारण पूरा घर जल रहा होता है यदि हम अपने जीवन में अपनी इच्छाओं को शांत करले, जो हो गया वो  ठीक है और किसी ने कह दिया तो भी ठीक है|हम में से ही कुछ लोग ऐसे होंगे जो क्रोध की सज़ा भुगत रहे होंगे..ऐसे क्रोध को हम क्यों नहीं त्याग देते जो माँ बेटे को अलग कर  देता है पति और पत्नी को भाई-भाई को अलग करवा  देता  है| हम क्यों नहीं शुक्र करते हैं भगवान का की जो हुआ बहुत अच्छा हुआ.. कई औरते पति के लेट आने पर अक्सर झगड़ा करती हैं पर यह क्यों नहीं समझती के पति लेट आया तो  भी भगवान का  शुक्र करे की आया तो सही… तो फिर गुस्सा आएगा ही नहीं अगर आता ही नहीं  तो क्या करते??? उन्हें समझना चाहिए अगर वो पति ही न रहे तो किस परगुस्सा करेंगे|  आदमी लोग अपनी पत्नियों पर क्रोध करते हैं के यह क्या बनाया मायके वालो ने कुछ सिखाया नहीं.. अगर पत्नी  ने दाल चावल बनाये तो भी शुक्र करे के मिले तो सही ऐसे बी लोग हैं जिन्हे सूखी रोटी तक भी नसीब नहीं होती तो क्रोध आएगा ही नहीं | इसलिए अपने ऐसे शत्रु को घर से निकल फेंके जो आपके घर में अशांति ही अशांति फैला देता है क्यांकि  क्रोधवश आप तो डूबोगे ही पर आपके  साथ  पूरे  परिवार को डूबना पड़ता है कभी कभी पति- पत्नी का झगड़ा होता है  पत्नी अपने ऊपर केरोसीन डाल लेती है खुद तो मर जाती है  पर बच्चो को दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं|  कभी सोचा है के हमारे छोटे बचो का क्या कसूर होता है  के आपके क्रोध की सज़ा आपके बचो को भुगतनी पड़ती है| कई औरते  तो ऐसी  भी होती हैं को जो क्रोध में जलने को तो त्यार हो जाती हैं परन्तु जल कर फिर वापिस बच जाती हैं  हाथ खराब हो जाता है चेहरा खराब हो जाता है जमाने की हंसी का कारन बनकर रह जाती हैं.. कई लोग ऊपर से तो गिरने को गिर जाते हैं परन्तु बच जाते हैं पर टाँगे कटवा देते, हाथ कटवा देते हैं, जुबान रह जाती है और ज़माने में मज़्ज़ाक़ का कारन बनकर रह जाते हैं सिर्फ  कुछ देर के  क्रोध के कारण | इसलिए क्यों न हम अपने जीवन को सरल बनाएं कोम्प्रोमाईज़ की आदत डाले.. इसलिए जो भगवान करता है वो अच्छा करता है  याद रखो के हमारा ईश्वर कभी भी हमारे लिए बुरा नहीं करेगा उसके हर काम में हमारी भलाई होती है हम ही हैं जो समझ नहीं पाते लेकिन जब परिणाम आता है तो पता लगता है के भगवान तुम ही सही थे | इसी बात पर मुझे एक कहानी याद आ गयी..

“जैसे एक आदमी था उसे कही भी नौकरी नहीं मिलती थी वो दर-दर भटकता था उसे कोई भी नहीं रखता था उसे लगता मैं सबसे बड़ा अभागी हु उसे जो भी  मिलता वो उसे कहता के तुम्हारे भगवान ने देखो मेरे साथ आज तक कभी अच्छा नहीं किया  देखो मुझे बचपन से लेकर अब तक सर्फ दुःख ही दुःख दिए,उसने मेरे साथ हमेश बे इंसाफ़ी ही की है  वो हर वक़्त ऊपर वाले को कोसता ही रहता|ऐसे करते करते एक दिन उसे दुबई में जॉब लग गयी उसमे अहंकार आ गया के मेरे भाग खुल गए अब मैं दुबई जाऊंगा बहुत कमाऊंगा मुझे भगवान की क्या ज़रूरत.. ऐसे ही जॉब का दिन भी आ गया उसकी फ्लिघ्त थी अगले दिन दुबई की इसलिए वो सुबह जल्दी उठा टैक्सी ली और भगा एयरपोर्ट की और पर रस्ते में टैक्सी का एक्सीडेंट हो गया और उसकी फ्लाइट निकल गई  उसने फिर से भगवान को कोसना शुरू क्र दिया देखा तुम तो कभी मेरा अच्छा होते हुए देख ही ही सकते मुंह तक आया हुआ नेवाला छीन लिया और आपकी किस्मत को फिर से कोसने लगा..  घर वापिस आया  और मुंह उतर क्र बैठ गया तभी उसे पता चला के जिस फ्लाइट में वो जाने वाला था उस फ्लाइट का टेक ऑफ करते ही क्रैश हो गया  और सब के सब यात्री मरे गए.. तब उसने भगवान का शुक्र किया ||”

क्रोध का नुकसान

क्रोध करने को तो आप एक पल के लिए करते हैं पर बाद में सारा दिन आपका कलप कलप कर जाता है|  क्रोध के बाद हम पश्चाताप करते हैं के मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था यह गलत हो गया मुझसे या ज़्यादा कह दिया मैंने.. काश मैंने क्रोध न किया होता कई बार आप ऐसा काम कर जाते हैं क्रोधवश के जिसकी वजह से हमें सारी उम्र रोना पड़ता है क्योंकि क्रोध अँधा होता है, क्रोध बहरा होता है, क्रोध पागल होता है, वो नहीं देखता है के सामने माँ है पिता है या बच्चा है और उस क्रोध की सज़ा तो हमको मिलती ही है  पर हमारे पूरे परिवार  को भी भुगतनी पड़ती  है | याद रखिये चूल्हे की अग्नि तो पानी डालने से बुझ जाती है पर हमारे अंदर क्रोध की अग्नि सब जलाने के बाद ही बुझती है क्रोधी व्यक्ति हमेशा अंदर ही अंदर जलता ही रहता है यह अग्नि कभी बुझती नहीं |

“एक गाँव में एक साधु आये उनकी बहुत ख्याति थी के वह बहुत दिगंबर साधु महात्मा हैं, वो कहते थे के मैंने अपने आप को जीत लिया  है इसलिए वो अग्नि के सामने बैठ कर तपस्या करते थे और कहते थे के यह अग्नि मेरा कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती | उसी गाँव में एक और विवेकी संत आये उन्होंने सोचा के यह संत कहते हैं के यह अग्नि मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकती तो ज़रा देखु के इनके अंदर सच में अग्नि बची है के नहीं| इसलिए जब वो तपस्या करके बैठे तो अग्नि सारी बुझ गई थी तो विवेकी संत ने  कहा महाराज आप कृपा करके थोड़ी अग्नि मुझे देदें.. उस साधु ने कहा के अब तो अग्नि बुझ चुकी है आप कल आएं| तो विवेकी साधु चले गए और  फिर थोड़ी देर बाद वो वापिस आये और कहा महाराज अग्नि है ? उन्होंने फिरसे कहा अभी तो कहा अग्नि बुझ चुकी है और वो संत  वापिस चले गए.. इसी प्रकार वो विवेकी संत 5 से 10 मिंट बाद फिर वापिस आये और कहने लगे के महाराज अग्नि है..?? साधु क्रोध में आकर कहने लगे के तुम्हे एक बार में सुनाई नहीं देता.. पागल हो क्या.. अभी तो कुछ देर पहले बताया के अग्नि बुझ चुकी है.. तभी उस विवेकी संत ने मुस्कुरा कर कहा के महात्मा अभी अग्नि कहा बुझी है? अग्नि तो आपके अंदर जल रही है अभी क्रोध रुपी अग्नि, लकड़ियों की अग्नि बुझने से क्या होगा.. “

कुछ अन्य नुक्सान..

  1. गुस्सा करने वाला व्यक्ति दूसरे का नुकसान कर पाये या नहीं लेकिन खुद का नुकसान तो जरूर कर लेता है। इससे उस व्यक्ति कोहृदय रोग,डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, नींद नहीं आना, मानसिक तनाव, प्रतिरोधक क्षमता में कमी आदि बीमारियाँ होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  2. इसके अलावा इस स्वाभाव के कारण उस व्यक्ति काकैरियर पीछे रह जाता है , उसके रिश्ते टूट कर बिखर जाते है। वह व्यक्ति खुद अपनों के दिल पर ऐसे घाव बना देता है जो कभी भर नहीं पाते।
  3. गुस्सा करने वाले व्यक्ति केअपने परिवार वाले भी उस पर विश्वास नहीं कर पाते , कोई उनसे आराम से बात नहीं कर पाता , ईमानदारी से सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते , विशेषकर बच्चों के लिए तो यह अनुभव भयानक होता है जो जिंदगी भर उनका दिल दुखाता है।

क्रोध पर नियंत्रण कैसे पाएं

आप अपने क्रोध को कण्ट्रोल करे अपने लिए नहीं अपने परिवार के लिए  अपने बच्चो के लिए..इसके लिए  शुक्र करना और सबर करना सीख ले और जब सबर और शुक्र करना आप सीख जाएं तो इच्छा कम हो जाएगी| सो गुस्से को कण्ट्रोल करने का सीधा रास्ता है इच्छा पर नियंत्रण करना| जब आप को गुस्सा आता है तो कुछ देर के लिए तो आपको बहुत अच्छा लगता है कुछ देर के लिए तो आप खुद को राजा समझते हो के देखा मेरे आगे कोई नहीं बोलता मैंने सबको चुप करवा दिया.. पर याद रखना क्रोधी व्यक्ति के पीठ पीछे सब लोग उनका मज़्ज़ाक़ उड़ाते हैं मुंहे बुरा भला कहते हैं  क्रोध करते हैं क्योंकि क्रोधी इंसान को कोई पसंद नहीं करता | मुँह पर तो तारीफ करते हैं पर बुराई शुरू क्र देते हैं आपके जाते ही, अगर हम सब अपने क्रोध पर नियत्रण करे तो सारा घर बच जाएगा वरना सारा घर जल जाएगा आपके क्रोध से| कुछ और ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें..

  1. आप दूसरे लोगों कोया परिस्थितियों को नहीं बदल सकते जो आपको गुस्सा दिलाते हैं लेकिन ऐसे में खुद में बदलाव लाने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।
  2. आपको भी महसूस होने लगता है कि गुस्सा आने परआप पर एक ताकतवर और अप्रत्याशित चीज हावी हो जाती है जो आपको नुकसान पहुंचाती है , अतः इसे कतई हावी ना होने दें।
  3. गुस्सा करने से पहले एक बार सोचें – क्या इस बात या स्थितिके लिए गुस्सा करना ठीक है ? क्या गुस्सा करके बचा हुआ दिन बर्बाद करना सही होगा ? क्या कोई दूसरा उपाय हो सकता है ? क्या यह कीमती समय का सदुपयोग है ?

क्रोध रोके रुका ही नहीं

क्रोध रोके रुका ही नहीं   
मुठ्ठियों में बँधा ही नहीं

कैसे मंज़िल पे पहुँचेगा वो
आजतक जो चला ही नहीं

बाँटते-बाँटते कर्ण की
गाँठ में कुछ बचा ही नहीं

कितने सालों से घर में कोई
खिलखिलाकर हँसा ही नहीं

एड्स या कैंसर की तरह
शक की कोई दवा ही नहीं

जो लिपट न सकी पेड़ से
सच कहूँ वो लता ही नहीं

ऋण सभी पर रहा साँस का
मरते दम तक चुका ही नहीं

 

 

Quotes – “Define yourself”

  • The only disability in life is a bad attitude.
  • Accept no one’s definition of your life, define yourself.
  • Everyone you will ever meet knows something you don’t.
  • Don’t stop when you are tired, STOP when you are DONE.
  • The most powerful weapon on earth is the human soul on fire.
  • Our lives are defined by opportunities, even the ones we miss.

  • Trust takes years to build, seconds to break and forever to repair.
  • The best thing about the future is it comes one day at a time.
  • If you are afraid of failure you don’t deserve to be successful!
  • The moment you give up is the moment you let someone else win.
  • It is not joy that makes us grateful. It is gratitude that makes us joyful.
  • Surround yourself only with people who are going to lift you higher.
  • Strength and growth come only through continuous effort and struggle.

  • We tend to judge others by their behavior, and ourselves by our intentions.
  • Forgiveness says you are given another chance to make a new beginning.
  • Failure doesn’t mean you are a failure… it just means you haven’t succeeded yet.
  • When you make a commitment, you build hope. When you keep it, you build trust.
  • If you desire to make a difference in the world, you must be different from the world.
  • Great achievement is usually born of great sacrifice, and is never the result of selfishness.

  • A word of encouragement after failure is worth more than an hour of praise after success.
  • If you want something you’ve never had then you’ve got to do something you’ve never done.
  • We can save many relations,If we understand a simple fact that people are not wrong, they are different.
  • Strength does not come from winning. Your struggles develop your strengths. When you go through hardships and decide not to surrender, that is strength.
  • We always Work for a Better Tomorrow.. But When Tomorrow Comes Instead of Enjoying it,We Again Think of a Better Tomorrow.. Let’s Have a Better Today!!!