तलाश है एक ऐसे शख्स की..

तलाश है एक ऐसे शख्स की, जो आँखों में उस वक़्त दर्द देखले..
जब दुनिया हमसे कह रही हो, क्या यार तुम हमेशा हस्ते ही रहते हो..

Talash hai ek ese shaks ki, jo ankhon mein us waqt dard dekhle..
Jab Duniya hamse keh rhi ho, kya yar tum hmesha Haste hi rhte ho..

अपने हालात का..

अपने हालात का खुद पता नहीं मुझको,
मैंने औरो से सुना है के मैं परेशान हूँ आजकल..

Apne halaat ka Khud Pta nahi mujhko,
Maine auro se Suna hai, ke main Pareshan hu ajkal..

आज भी, आंसू से..

आज भी, आंसू से देती हूँ ब्याज तेरा..
तेरी मोहब्बत का कर्ज, बहुत भारी पड़ा..।।

Aaj bhi, Aansu se deti hu Byaaz tera..
Teri Mohabbat ka Karz, bahut Bhari pdaa..

निगाहों से भी..

निगाहों से भी चोट लगती है,
जब हमें कोई देखकर भी अनदेखा कर देते हैं..

Nigahon se bhi Chot lagti hai,
jab hmein koi Dekh kar bhi Andekha kar dete hain..

कचरे में फेंकी रोटियां

कचरे में फेंकी रोटियां रोज़ ये बयां करती हैं,
की पेट भरते ही इंसान अपनी औकात भूल जाता है..

kachre mein fainki rotiya roz yeh byan karti hain,
ki pait bharte hi Insaan apni Aukaat bhool jata hai..

जब कोई इंसान..

जब कोई इंसान दर्द में होता है,
तब वो सबसे ज़्यादा रब्ब के करीब होता है..

Jab koi Insaan Dard mein hota hai,
tab wo sabse zyada Rabb ke kareeb hota hai..

वो मुझे भूल गया..

वो मुझे भूल गया तो क्या हुआ.. ???
लोग हाथों से दफ़न कर के भूल जाते हैं के कबर कौन सी है..

Wo mujhe bhool gya to kya hua.. ???
log hatho se Dafan kar ke bhool jate hain ke kabar kaun si hai..

एहसान किसी का..

एहसान किसी का वो रखते नहीं, मेरा भी चुका दिया..
जितना खाया था नमक मेरा, मेरे ज़ख्मो पे लगा दिया..

Ehsaan kisi ka wo rakhte nahi, mera bhi chuka diya..
jitna khaya tha namak mera, mere Zakhmo pe lgaa diya..

खुदा! करे..

खुदा! करे तू मेरी याद में खाक छाने,
खुदा! करे मैं तुझे खाक में भी ना मिलू..

Khuda! kare tu meri yad mein khak chhane,
Khuda! kare main tujhe khak mein bhi na milu..